हंसते-खेलते परिवार को बीमारी ने किया दाने-दाने का मोहताज

जगन्नाथपुर l परिवार का मुखिया आठ वर्षों से पड़ा है खटिया पर तोड़ांगहातु पंचायत के मुंडासाई का रहने वाला है परिवार प्रशासन से मदद नहीं मिलने के कारण परिवार आर्थिक संकट में जगन्नाथपुर : आठ वर्ष पहले तक हंसता-खेलता परिवार के मुखिया को अचानक ऐसी बीमारी हुई कि मुंह से आवाज निकलना व चलना-फिरना बंद […]

जगन्नाथपुर l परिवार का मुखिया आठ वर्षों से पड़ा है खटिया पर

तोड़ांगहातु पंचायत के मुंडासाई का रहने वाला है परिवार
प्रशासन से मदद नहीं मिलने के कारण परिवार आर्थिक संकट में
जगन्नाथपुर : आठ वर्ष पहले तक हंसता-खेलता परिवार के मुखिया को अचानक ऐसी बीमारी हुई कि मुंह से आवाज निकलना व चलना-फिरना बंद हो गया. मानो लक्ष्मी रूठ गयी हों. अचानक घर में आय बंद हो गया. घर के लोग दाने-दाने के मोहताज हो गये. जगन्नाथपुर मुख्यालय से चार किलोमीटर दूर तोड़गहातु पंचायत के तोड़गहातु गांव स्थित मुंडासाई के गणेश चंद्र दास अज्ञात बीमारी का शिकार हो गया. वह खटिया पर पड़े-पड़े जिंदगी और मौत से जूझ रहा है.
सीडीपीओ कार्यालय से उसे न वैशाखी मिली, न व्हील चेयर. अब घर की जिम्मेदारी गणेश की पत्नी आरती देवी पर आ गयी. आरती ने कुछ साल तक अपने गरीब मायके वालों की मदद ली. एक दिन वहां का दरवाज़ा भी बंद हो गया. जीविका चलाने के लिए घरेलू काम करना चाहा. इसके कारण बीमार पति और एक लड़के की देख भाल प्रभावित होने लगी. गांव व आस-पास कभी-कभी मजदूरी करने चली जाती है. 17 साल का एकलौता लड़का, बुआ के घर डांगुवापोसी में रहकर सरकारी स्कूल में पढ़ रहा है. परिवार मदद के लिए प्रसाशन से गुहार लगा रहा है. एक साल पहले राशन कार्ड बना दिया. केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाएं शायद ऐसे ही परिवारों के लिए बनायी गयी है, लेकिन यहां तक पहुंचते-पहुंचते अधिकांश योजनायें दम तोड़ देती हैं.
दो माह एमजीएम में रहा, पैसे की कमी से नहीं हुआ इलाज
गणेश को इलाज के लिये 30 जून 2015 को एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर में भर्ती कराया गया. यहां 27 अगस्त 2015 तक दो महीने रहा. पैसे के अभाव में उसका बेहतर इलाज नहीं हो पाया. डॉक्टर ने दवा देकर पत्नी से कहा घर पर पति की सेवा करो. आठ मार्च को चाईबासा में विकलांग प्रमाण पत्र बना, लेकिन अब तक पेंशन नहीं आयी है.
सात माह पहले पीड़ित गणेश दास का पेंशन फार्म सीडीपीओ कार्यालय में जमा किया है. अब तक पेंशन नहीं आयी है.
– अश्रिता लागुरी, सेविका
पीड़ित परिवार से मिला. गणेश दास जिंदगी और मौत से जूझ रहा है. अब तक यहां के चिकित्सक व प्रखंड कर्मी मौन बैठे हैं.
– शशि दास, समाजसेवी

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