सदर अस्पताल में नवजात शिशु सप्ताह कार्यक्रम
कम उम्र में शादी व अशिक्षा सबसे बड़ा कारण
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में नवजात शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक है. इसका मुख्य कारण लड़कियों की कम उम्र में शादी और अशिक्षा है. उक्त बातें सिविल सर्जन डॉ हिमांशु भूषण बरवार ने कहीं. वे बुधवार को सदर अस्पताल में आयोजित नवजात शिशु सप्ताह कार्यक्रम में बोल रहे थे. इसके पूर्व सीएस ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया.
गर्भवती महिलाओं को चार बार जांच कराना अनिवार्य : सीएस ने कहा पश्चिमी सिंहभूम में एक साल तक के नवजात शिशु की मृत्यु दर 53 (1000 में) और जन्म से 28 दिन के नवजात शिशु की मृत्यु दर 33 (1000 में) है. झारखंड में एक वर्ष तक के नवजात शिशु की मृत्यु दर 32 और जन्म से 28 दिन तक शिशु की मृत्यु दर 23 है.
शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए गभर्वती महिलाओं को चार बार जांच कराना अनिवार्य है. संस्थागत प्रसव से नवजात मृत्यु दर में कमी आयेगी. उन्होंने कहा सहिया और एएनएम द्वारा गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया जायेगा.
छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलायें बच्चों को : जिला कुष्ठ पदाधिकारी डॉ हरिपाल सोनार ने कहा नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद मां का दूध पिलाना है. इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलाना है. गभर्वती महिलाओं को खान-पान सही समय पर करना है. डॉ संजय कुजूर, डॉ नीलांजलि और यूनिसेफ के अनिल कुमार सिंह ने जानकारी दी. संचालन अवनीश कुमार सिन्हा व धन्यवाद ज्ञापन डीपीएम नीरज कुमार यादव ने किया. मौके पर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ चंद्रावती बोयपाई, जिला लेखा प्रबंधक ब्रजेश झा समेत अन्य उपस्थित थे.
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