बड़े भाई की स्टेशन पर है किताब दुकान, पिता करते हैं मजदूरी
घर में किसी को नहीं है रामचंद्र की गिरफ्तारी की जानकारी
पहले दिल्ली, फिर इलाहाबाद, इसके बाद वाराणसी को बनाया अपना ठिकाना
चक्रधरपुर : फर्जी मेट्रिमोनियल साइट चलाने के आरोप में वाराणसी में गिरफ्तार रामचंद्र चौरसिया चार वर्ष पूर्व चक्रधरपुर छोड़ चुका है. पिता गोपाल चौरसिया के अनुसार रामचंद्र पहले दिल्ली गया. उसके बाद इलाहाबाद, वर्तमान में वह बनारस में रह रहा है. बेटा क्या करता है, इसकी जानकारी पिता को नहीं है. दूरभाष पर कभी कभी बेटा से बातचीत होती है. रामचंद्र के बड़े भाई की चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पर किताब की दुकान है. इसी दुकान से वह अपना परिवार चलाता है. पिता की आर्थिक स्थित बहुत अच्छी नहीं है मजदूरी कर अपना भरण पोषण करते हैं.
