गोइलकेरा : स्कूलों में संचालित एमडीएम अब स्कूल प्रबंधन के लिए परेशानी के कारण बनती जा रही हैं. इसका कारण स्कूलों में बरतनाें व रसोइयाें की कमी है. स्कूलों में थाली समेत अन्य बरतन की खरीदारी पिछले छह वर्षों से नहीं हुई है. शून्य ड्रॉप आउट को लेकर स्कूलों में बच्चों की संख्या में दोगुना से भी अधिक वृद्धि हुई है, लेकिन रसोइया व बरतन जैसे संसाधन छह वर्ष पूर्व की तरह हैं. आंकड़ों के मुताबिक कम बरतन के कारण प्रखंड के करीब 70 स्कूल प्रभावित हो रहे हैं.
इन स्कूलों में दो से तीन बार खाना बनाया जाता है, तभी पूरे बच्चों को एमडीएम मिल पाता है. हालांकि बरतन की कमी को लेकर 2006 से ही लगातार स्कूलों के प्रधान शिक्षक पत्राचार करते आ रहे हैं, लेकिन इस दिशा में कोई कारगर पहल नहीं हो पायी है. शिक्षक बीइइओ को लिखित दे रहे हैं, लेकिन बीइइओ की ओर से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है. कई स्कूलों में तो बरतनों की कमी के कारण संयोजिका व रसोइया ने हड़ताल पर जाने तक की बात कह दी है.
छात्र संख्या के अनुपात में रसोइया की भी कमी सामने आने लगी है. इधर, मामले पर बीइइओ डोमन मोची ने कहा कि इस संबंध में मिले आवेदनों को अग्रसारित कर भेज दिया जा रहा है. फंड मिलते ही समस्या दूर कर दी जायेगी. जिन स्कूलों ने कमी को बताया है उनमें मुख्य रूप से उमवि जाटीसेरेंग, पुराना गोइलकेरा, घोड़ाडूबा समेत करीब 70 स्कूल शामिल हैं.
