रांची. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड के टीला इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में बीफार्मा काउंसेलिंग में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है. कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) को संस्थान के आवेदन पर दोबारा विचार कर उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने संस्थान की रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया.
JUT की संबद्धता नहीं होने पर PCI ने खारिज किया था आवेदन
सुनवाई के दौरान संस्थान की ओर से पीठ को बताया गया कि PCI ने बीफार्मा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए दिए गए आवेदन को मुख्य रूप से इस आधार पर खारिज किया था कि संस्थान ने झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (JUT) की संबद्धता की सहमति प्रस्तुत नहीं की थी.
संस्थान के अनुसार, राज्य सरकार ने 9 दिसंबर 2025 को बीफार्मा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए सशर्त NOC जारी की थी. इसके बाद JUT ने 9 जुलाई 2026 को संबद्धता के लिए सहमति प्रदान कर दी.
काउंसेलिंग पूरी नहीं होने का मिला लाभ
पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि 25 अगस्त 2026 के एक अन्य मामले में काउंसेलिंग की समय-सीमा बढ़ायी गयी थी और PCI को कुछ संस्थानों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मंजूरी देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था.
मौजूदा मामले में काउंसेलिंग अभी पूरी नहीं हुई है. इसे असाधारण मामला मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने PCI को टीला इंस्टीट्यूट के आवेदन पर प्रक्रिया पूरी कर उचित आदेश जारी करने का निर्देश दिया.
3 जुलाई की अस्वीकृति पर फिर होगा विचार
PCI ने संस्थान के आवेदन को पहले 3 जुलाई 2026 को खारिज किया था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब PCI को आवेदन पर दोबारा प्रक्रिया पूरी कर मंजूरी के संबंध में उचित निर्णय लेना होगा. पीठ ने स्पष्ट किया कि आदेश का उद्देश्य संस्थान को मौजूदा काउंसेलिंग में भाग लेने का अवसर उपलब्ध कराना है. आदेश के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका का निष्पादन कर दिया.
