मोटर दुर्घटना में पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को बनाया गया है सरल : पीडीजे

मोटर दुर्घटना में पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को बनाया गया है सरल : पीडीजे

फोटो फाइल: 14 एसआइएम:16-उदघाटन करते अतिथि सिमडेगा. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में रविवार को व्यवहार न्यायालय सभागार में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण अधिनियम के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य आम लोगों को मोटर दुर्घटनाओं के बाद कानूनी अधिकार, मुआवजा प्राप्ति की प्रक्रिया तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी देनी थी. कार्यशाला का उदघाटन प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा,अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरंजन सिंह, पुलिस अधीक्षक एम अर्शी सहित अन्य न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि मोटर दुर्घटनाओं में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया गया है. उन्होंने बताया कि दुर्घटना की स्थिति में छह माह के भीतर दावा दायर करना अनिवार्य है. हिट एंड रन मामलों में भी मुआवजा देने की स्पष्ट व्यवस्था है. उन्होंने कहा कि यदि दुर्घटना सरकारी वाहन से होती है तो राज्य सरकार पूर्ण मुआवजा प्रदान करती है. हत्या जैसे मामलों में विक्टिम कम्पनसेशन स्कीम के तहत भी पीड़ितों या उनके परिजनों को मुआवजा मिल सकता है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मोटर दुर्घटना मामलों में कोर्ट फीस केवल 10 रुपये है. जिससे गरीब और असहाय पीड़ित भी न्याय की प्रक्रिया से जुड़ सकें. कार्यशाला के प्रारंभ में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव मरियम हेमरोम ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट किया. कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता अलका बागे और धन्यवाद ज्ञापन असिस्टेंट एलएडीसीएस सुकोमल ने किया. बॉक्स कमाई में हुई क्षति के आधार पर मिलता है मुआवजा: एडीजे अपर जिला न्यायाधीश नरंजन सिंह ने मोटर दुर्घटना मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया. उन्होंने कहा कि पीड़ित व्यक्ति को इलाज में हुए खर्च, कार्य में बाधा के कारण हुए आर्थिक नुकसान तथा स्थाई रूप से विकलांग होने की स्थिति में पूरे जीवनकाल की संभावित आय की गणना के आधार पर मुआवजा प्रदान किया जाता है. उन्होंने कहा कि यदि दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो मृतक की उम्र को ध्यान में रखते हुए 60 वर्ष तक की अनुमानित आय का आकलन कर ट्रिब्यूनल द्वारा मुआवजा निर्धारित किया जाता है. बॉक्स तेज रफ्तार और शराब हादसों के बड़े कारण हैं: एसपी पुलिस अधीक्षक एम अर्शी ने सड़क हादसों के मुख्य कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लगभग 60 प्रतिशत दुर्घटनाएं तेज रफ्तार के कारण होती हैं. शराब सेवन के कारण भी हादसों में बढ़ोत्तरी हुई है. उन्होंने कहा कि सिमडेगा जिले में एनएच की लंबाई अधिक होने के कारण अधिकांश मौतें इन्हीं मार्गों पर हो रही हैं. उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद पहले गोल्डन ऑवर में पीड़ित को सही इलाज मिलना अत्यंत आवश्यक है.एसपी ने गुड सेमरिटन योजना की जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी घायल को अस्पताल पहुंचाता है तो उसे 25 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा. साथ ही उसे पुलिस या अदालत में परेशान नहीं किया जाएगा. इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा घायल को 50 हजार रुपये तक का निःशुल्क इलाज देने की व्यवस्था भी की गयी है. बॉक्स स्थायी लोक अदालत की भी अहम भूमिका:अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि जहां पक्षों के बीच आपसी समझौता संभव हो ,वहां चार्जशीट दायर होने से पहले ही लोक अदालत के माध्यम से मामले का निपटारा किया जा सकता है. यह प्रक्रिया समय और संसाधन दोनों की बचत करती है. बॉक्स हिट एंड रन मामलों में 64 को मिल चुका है मुआवजा : डीटीओ जिला परिवहन पदाधिकारी संजय कुमार बाखला ने एक अप्रैल 2022 से जिले में अब तक दर्ज 77 हिट एंड रन मामलों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इसमें से 64 मामलों में मुआवजा भुगतान किया जा चुका है. सात मामलों में वाहन ट्रेस हो चुका है. उन्होंने लोगों से सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की. वरिष्ठ अधिवक्ता सगीर अहमद ने पुलिस अधिकारियों को सही और सटीक अनुसंधान करने की सलाह दी. साथ ही वाहन मालिकों को पूर्ण बीमा कराने की आवश्यकता पर बल दिया. बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद ने अधिनियम के विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी साझा की.

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Author: VIKASH NATH

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