सिमडेगा. आचार्य पद्मराज ज्योतिष गुरुकुल टुकूपानी में आचार्य पद्मराज स्वामी जी महाराज के तीन दिवसीय तप, जप व मौन समेत तीन दिनों की दीपावली साधना संपन्न हुई. उन्होंने नवकार, गायत्री, लोगस्स आदि विभिन्न मंत्रों का उच्चारण कर मंगल पाठ सुनाया और क्षेत्र वासियों को दीपावली पर्व की बधाई दी. गुरुदेव ने अपने हाथों से सबको अभिमंत्रित जल के साथ प्रसाद देकर तप का पारणा किया. पंचवर्णी दीपावली पर्व के अंतर्गत धनतेरस, रूप चौदस, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा, गौतम प्रतिपदा, महावीर निर्वाणोत्सव, भाई दूज आदि त्योहारों की विवेचना करते हुए बताया कि ईसा पूर्व 527 की दीपावली की मध्य रात में तीर्थंकर महावीर प्रभु का महानिर्वाण हो गया था. आचार्य जी ने कहा कि दीपावली का त्योहार व्यापारी वर्ग अर्थात वैश्य वर्ण का त्योहार है. वैश्य समाज की आराध्या देवी माता लक्ष्मी हैं. इसलिए इस पर्व में विशेष रूप से माता लक्ष्मी की आराधना, उपासना की प्रवृत्ति है. उनके साथ ही आरोग्य के लिए धनवंतरी देव, धन की रक्षा के लिए कुबेर देव और आकाल मृत्यु के निवारण के लिए यमराज की भी उपासना की जाती है. कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गौतम प्रतिपदा और गोवर्धन पूजा के रूप में जाना जाता है. मौके पर राहुल प्रसाद, ओजस्वी कुमारी, आराध्या कुमारी, अतिशय प्रसाद आदि ने वक्तव्य, कविता द्वारा अपने भाव व्यक्त किये.
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