कोलेबिरा के किसान औने-पौने दाम पर आम बेचने को मजबूर

बिरसा हरित आम बागवानी से अच्छी पैदावार के बावजूद नहीं मिल रहा उचित मूल्य

कोलेबिरा. कोलेबिरा प्रखंड के सैकड़ों किसान इन दिनों आम की फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से परेशान हैं. लगभग छह से सात वर्ष पूर्व मनरेगा योजना के तहत बिरसा हरित आम बागवानी योजना में किसानों ने अपनी जमीनों पर आम की विभिन्न किस्मों के पौधे लगाये थे. अब यह पेड़ फल देने लगे हैं और इस वर्ष आम की अच्छी पैदावार हुई है. बेहतर उत्पादन से किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन बाजार में अपेक्षित मूल्य नहीं मिलने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है. किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा घोषणा की गयी थी कि मनरेगा योजना के तहत आम बागवानी करने वाले किसानों की उपज को जिला प्रशासन, जेएसएलपीएस के माध्यम से बाजार भाव से 10 प्रतिशत अधिक दर पर खरीदेगा. किसानों को जानकारी मिली है कि आम्रपाली आम को 42 रुपये प्रति किलो की दर से विदेश (लंदन) तथा 35 रुपये प्रति किलो की दर से अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है. इसके बावजूद स्थानीय किसानों से आम की खरीद मात्र 14 से 15 रुपये प्रति किलो की दर से करने की बात कही जा रही है. नवाटोली निवासी किसान विनोद कुमार ने बताया कि उन्होंने मनरेगा योजना के तहत दो एकड़ भूमि में आम्रपाली, मालदा, दशहरी समेत विभिन्न किस्मों के आम के पौधे लगाये हैं. इस वर्ष बागान में अच्छी फसल हुई है. उन्होंने जब जेएसएलपीएस कर्मियों से खरीद दर की जानकारी ली, तो उन्हें 14 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदारी की बात बतायी गयी. वहीं, किसान कलिंदर केरकेट्टा ने बताया कि उन्होंने लगभग एक एकड़ भूमि में बिरसा हरित आम बागवानी की है. फसल पूरी तरह तैयार है, लेकिन उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण आम पेड़ों पर ही लगे हुए हैं. आंधी-पानी के कारण कई फल गिर कर नष्ट हो रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. ललिता देवी, रवींद्र कुमार, पूसा प्रधान, कंचन देवी सहित अन्य किसानों ने कहा कि इस वर्ष अच्छी पैदावार से उन्हें बेहतर आय की उम्मीद जगी थी. जिला प्रशासन की घोषणा के बाद किसानों को लगा था कि उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिली है. किसानों ने प्रशासन से आम की खरीद उचित दर पर सुनिश्चित करने की मांग की है.

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