सिमडेगा. आनंद भवन धर्मशाला में मारवाड़ी महिला समिति के तत्वावधान में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ. कथा के पहले दिन स्थानीय व कोलकाता से आये आचार्यों ने विधि-विधान व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अनुष्ठान संपन्न कराया. इस दौरान पंचदेवों का आह्वान कर उनकी स्थापना व पूजन किया गया. मुख्य यजमान के रूप में राजू केशरी, कमल शर्मा, राजेंद्र बामलिया व सुभाष शर्मा ने सपरिवार पूजा-अर्चना में भाग लिया. पूजा से पूर्व राम जानकी मंदिर परिसर से शोभायात्रा निकाली गयी. शोभायात्रा में यजमानों ने श्रद्धा व आस्था के साथ पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता को अपने सिर पर धारण किया और आयोजन स्थल तक पहुंचे. कथा के पहले दिन आचार्य वासुदेव गौतम ने कहा कि मानव जीवन में सच्चे भाव व आत्मिक शांति की प्राप्ति के लिए भक्ति का मार्ग अपनाना जरूरी है. बिना भक्ति के ज्ञान कभी सार्थक नहीं हो सकता. उन्होंने श्रीमद्भागवत महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत कथा कोई साधारण ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात श्रीहरि का स्वरूप है. इसके श्रवण मात्र से मानव जीवन धन्य हो जाता है तथा जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है. कहा कि कलयुग के प्रभाव से जब ज्ञान और वैराग्य मूर्छित हो जाते हैं, तब श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से उन्हें पुनः चेतना व नवयौवन प्राप्त होता है. आचार्य ने आधुनिक जीवनशैली और परिवारों में बढ़ते बिखराव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि माता-पिता और संतानों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करने के लिए गोकर्ण चरित्र का श्रवण व अध्ययन अत्यंत आवश्यक है. इसके आदर्शों को जीवन में अपनाने से संस्कारों व विचारों में सकारात्मक परिवर्तन आता है. कथा के बाद मुख्य यजमानों व श्रद्धालुओं द्वारा महाआरती की गयी. इसके बाद उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में मारवाड़ी महिला समिति की सदस्याओं के साथ समाजसेवी ओमप्रकाश शर्मा, पवन जैन (मोहित), श्यामलाल शर्मा, विनोद अग्रवाल, प्रदीप शर्मा, मनोज अग्रवाल (खट्टू), अशोक गोयल, रामप्रताप शर्मा आदि सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं.
बिना भक्ति के सार्थक नहीं हो सकता ज्ञान : आचार्य वासुदेव
आनंद भवन धर्मशाला में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ शुरू
