सिमडेगा: सिमडेगा कॉलेज में शुक्रवार को महाविद्यालय का स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया. समारोह में कॉलेज की शैक्षणिक यात्रा, सांस्कृतिक विरासत और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा की झलक देखने को मिली. कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और विभिन्न विभागों के विद्यार्थी शामिल हुए.
कार्यक्रम की शुरुआत जनजातीय विभाग के विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों के पारंपरिक स्वागत और स्वागत गीत से हुई. इसके बाद प्राचार्य प्रो. देवराज प्रसाद और शिक्षकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया.
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अनुशासन और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का संदेश
प्राचार्य प्रो. देवराज प्रसाद ने महाविद्यालय की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला. उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम, संस्कार और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाकर आगे बढ़ने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस संस्था की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का अवसर है.
जनजातीय नृत्य ने बांधा समां
इसके बाद विभिन्न विभागों और छात्रावासों के विद्यार्थियों ने नृत्य, गीत और नाटक की रंगारंग प्रस्तुतियां दीं. संस्कृत, मुंडारी, खड़िया और भूगोल विभाग के विद्यार्थियों ने जनजातीय नृत्य प्रस्तुत कर झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति की झलक दिखाई. वहीं, बीसीए विभाग की सामाजिक जागरूकता पर आधारित नाट्य प्रस्तुति और हिंदी विभाग के विद्यार्थियों की वृद्धाश्रम पर आधारित प्रस्तुति ने दर्शकों को प्रभावित किया.
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उत्कृष्ट प्रतिभागियों को दिए गए प्रमाण पत्र
समारोह के दौरान ‘हर घर तिरंगा’ सहित विभिन्न कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. प्रमाण पत्र वितरण में प्रो. रीमा सुप्रिया कुजूर और प्रो. विशेश्वर मुंडा ने सहयोग किया.
समारोह में डॉ. ब्रजेश प्रियदर्शी, डॉ. तिरियो एक्का, डॉ. रोशन शान्तिनन्दन टेटे, प्रो. विद्याशंकर कुमार, डॉ. अतेन्द्र कुमार, डॉ. जितेश पासवान, डॉ. दीपक कुमार, प्रो. संजय कुमार, प्रो. संज्योति लकड़ा, प्रो. प्रदीप लोहरा, प्रो. ओलिव डूंगडूंग, प्रो. उर्मिला देवी, प्रो. चेतन सिंह मुंडा, डॉ. सचिन कुमार साहू, डॉ. स्मिता कुमारी राम और प्रो. कौशिक कुमार समेत महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे.
अंत में कला एवं संस्कृति इकाई के समन्वयक डॉ. तिरियो एक्का ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया. समारोह ने महाविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा, सांस्कृतिक विविधता और विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया.
