सीनियर में आसनबेड़ा व जूनियर वर्ग में ढोढीजोर विजेता

कुरडेग के चापाबारी में बुजुर्ग दिवस पर आयोजित हॉकी प्रतियोगिता संपन्न

सिमडेगा. कुरडेग प्रखंड के चापाबारी में बुजुर्ग दिवस पर गोंडवाना आदिवासी कल्याण एवं विकास मंच द्वारा आयोजित 15वीं हॉकी प्रतियोगिता का समापन किया गया. अंडर-15 वर्ग के फाइनल मुकाबला की शुरुआत झारखंड प्रदेश गोंड आदिवासी महासभा के खेल मंत्री सहदेव मांझी और समाजसेवी शिक्षक बीरबल मांझी ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया गया. फाइनल मैच में ढोढीजोर गोटुल केंद्र ने गोंडवाना विकास विद्यालय को 2-0 से पराजित कर विजेता बना. वहीं सीनियर वर्ग के फाइनल मुकाबला आसनबेड़ा ए टीम और आसनबेड़ा बी टीम के बीच खेला गया, जिसमें आसनबेड़ा ए टीम ने मैच जीत कर चैंपियन बना. सीनियर वर्ग के मैच की शुरुआत मुख्य अतिथि जशपुर गोंड महासभा के अध्यक्ष जद्दी सिंह व विशिष्ट अतिथि केरसई बीडीओ ज्ञानमनी एक्का ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया. फाइनल मुकाबला के बाद मंचीय कार्यक्रम की शुरुआत चापाबारी के पाहन ने ग्रामीण देवी-देवता की पूजा कर की. कार्यक्रम के दौरान गोंडवाना लॉज की छात्राओं ने समाज के 50 बुजुर्गों का स्वागत पैर धोकर, माला पहना कर और मिठाई खिलाकर किया. स्वागत भाषण अध्यक्ष रामचंद्र मांझी ने किया. मुख्य अतिथि जद्दी सिंह ने कहा कि गोंड समाज अपने बुजुर्गों व बड़ों का आदर सम्मान करने अच्छी तरह से जानता है. आज भी गोंड समुदाय अपने सभी कार्यक्रमों की शुरुआत अपने पूर्वजों और वरिष्ठों को याद करते हुए करते हैं. बीडीओ ज्ञानमनी एक्का ने कहा कि गोंड समुदाय वर्ष में कई बार सामाजिक आयोजन करता है, जो समाज की एकजुटता का प्रतीक है. कमलेश्वर मांझी ने कहा कि सामाजिक आयोजन का उद्देश्य समाज के लोगों में चेतना जगाने के लिए है. मौके पर प्रमुख तरण भोय, मुखिया जागेश्वर प्रधान, मुखिया सुनीता देवी, गजेंद्र मांझी, भुनेश्वर बेसरा, हीरधर मांझी, माधुरी देवी ने भी अपने विचार व्यक्त किये. मौके पर समाज के 50 बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक उपहार दिया गया. इस अवसर पर विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम के अंत में विजेता व उपविजेता टीम को पुरस्कृत किया. वहीं दोनों टीमों को राजमनी प्रधान और हॉकी कोच तारिणी कुमारी द्वारा खेल किट पुरस्कार स्वरूप दिया गया. अनुशासित टीम का पुरस्कार कोनसकेली को दिया गया. उभरती टीम का पुरस्कार चापाबारी को दिया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में जयनंदन मांझी, भुनेश्वर बेसरा, सुखराम मांझी, कामेश्वर भोय, त्रिभुवन भोय, नंद किशोर भोय, किशोर भोय, अनुज बेसरा, रघुनाथ मांझी, राजू मांझी, नीलंबर बेसरा, भूपेंद्र मांझी आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

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By Prabhat Khabar News Desk

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