जो श्रेयस्कर है, उसे स्वीकार करें : डॉ पद्मराज स्वामी

जो श्रेयस्कर है, उसे स्वीकार करें : डॉ पद्मराज स्वामी

सिमडेगा. आचार्य पद्मराज ज्योतिष गुरुकुल टुकूपानी के सभागार में साप्ताहिक सत्संग सभा हुई. इसमें आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज ने कहा कि हमारे जीवन में हमेशा दो मार्ग होते हैं. एक मार्ग प्रेय का है और दूसरा मार्ग श्रेय का. प्रेय का अर्थ है जो आपको अच्छा लगता है और श्रेय का अर्थ है जो सचमुच में आपके लिए अच्छा होता. जैसे कोई वस्तु बहुत प्रिय हो सकती है, किंतु उसका परिणाम आपके लिए घातक हो सकता है. जैसे कि मधुमेह के मरीज के लिए मिठाई. उसी तरह एक दूसरी वस्तु है, जो उतनी प्रिय भले न हो किंतु उसका परिणाम आपके लिए हमेशा हितकर होता है. जैसे बीमार व्यक्ति के लिए दवाई. दवाई का स्वाद कड़वा हो सकता है, किंतु उसका परिणाम बहुत मधुर होता है. बस आपको अपने जीवन में इस बात को ठीक से पहचानने की जरूरत है कि आपके लिए क्या श्रेयस्कर है. जो श्रेयस्कर है, उसे पहचानिए और हर हाल में उस पर कायम रहिए. यही सफलता का यथार्थ मार्ग है. इसका बोध हमें सत्संग से ही प्राप्त होता है. इसलिए जीवन में जब भी सत्संग का अवसर मिले, उसे लपक लीजिये. सभा में गुरुमा वसुंधरा जी ने प्रेरक भजनों की प्रस्तुति की. मुंबई से दर्शन के लिए आये गोपाल दत्त का स्वागत किया गया. उन्होंने गुरुदेव से जुड़े संस्मरणों को सुनाते हुए सुमधुर भजन प्रस्तुत किया. कार्यक्रम के बाद मंगल पाठ व प्रसाद का वितरण हुआ. मौके पर जैन सभा के अध्यक्ष प्रवीण जैन, गुलाब जैन, सूरज प्रसाद, राधिका देवी, सुनीता देवी आदि सक्रिय रूप से उपस्थित थे,

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By Prabhat Khabar News Desk

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