महाबुआंग में पुलिस पीएलएफआइ से मुठभेड़ की कहानी एसपी राजीव रंजन सिंह की जुबानी
सिमडेगा : महाबुआंग में पुलिस पीएलएफआइ मुठभेड़ की पूरी कहानी एसपी राजीव रंजन सिंह ने प्रभात खबर को अपनी जुबानी सुनायी. कहा कि चार जनवरी को उन्हें सूचना मिली कि आठ लोग पीएलएफआइ में प्रशिक्षण लेने के लिए महाबुआंग जानेवाले हैं. सूचना पक्की थी. पीएलएफआइ के पूर्व एरिया कमांडर रूपचंद पाइक के साथ के छत्तीसगढ़ का एक उग्रवादी समेत आठ लोग प्रशिक्षण लेने के लिए महाअुबांग आरओसी बस से जानेवाले थे. पुलिस रूपचंद पाइक को पहचानती थी. पुलिस ने उग्रवादियों को पकड़ने के लिए फिल्मी कहानी की तरह एक योजना बनायी. एक टीम में बोलबा थाना प्रभारी अरुण महथा व कोलेबिरा थाना प्रभारी विद्यापति सिंह को शामिल किया गया. सभी आठ लोग आरओसी बस में बैठ चुके थे.
एसपी ने दो आरक्षी को ऑस्कर किस्पोट्टा व संदीप मिंज को सिविल ड्रेस में बस में बैठा दिया. बस में बैठे आरक्षी पूरी स्थिति की रिपोर्ट एसएमएस के माध्यम से एसपी व एसडीपीओ को भेज रहे थे. बानो जाने के क्रम में आरओसी बस को लचड़ागढ़ में रोक कर सभी आठ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.
पुछताछ में रूपचंद पाइक ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए उन्हें कहां जाना है पता नहीं. उन्हें महाबुआंग के जीतु टोली स्कूल के पास आने को कहा गया है. वहां से पीएलएफआइ उग्रवादी उन्हें प्रशिक्षण के लिए अन्यत्र ले जायेंगे. स्कूल के पास बैठने की सूचना दिनेश गोप ने दी थी. उक्त जानकारी हासिल करने के बाद पुलिस ने बानो इंस्पेक्टर रविशंकर सिंह व थाना प्रभारी सुबोध लकड़ा के अलावा नौ आरक्षियों की टीम बनायी. सभी को आरओसी बस में बैठा कर महाबुआंग जीतु टोली स्कूल के पास भेज दिया गया. सभी जवान हथियार को चादर से छिपाये हुए थे. बस में गयी पुलिस की टीम स्कूल के पास दस्ता के आने का इंतजार करती रही. पीएलएफआइ दस्ता के लोग लगभग 6.15 बजे शाम को स्कूल के पास आये तथा दूर से जवानों को अपना साथी समझ कर चलने का इशारा किया. किंतु जवान वहां से नहीं मिले. इसके बाद उग्रवादी सभी को लेने के लिए थोड़ा पास आये. इसी क्रम में उग्रवादी पुलिस को देख कर गोलीबारी शुरू कर दी. पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की जिसमें पीएलएफआइ का एरिया कमांडर विमल पाइक समेत एक अन्य उग्रवादी मार गया.
डीजीपी ने जवानों का हौसला बढ़ाया
घटना में शामिल जवानों का हौसला बढ़ाते हुए डीजीपी ने कहा कि अगली बार दो नहीं 20 उग्रवादियों को लुढ़काना है. इस सफलता से डीजीपी काफी खुश थे. उन्होंने अभियान में शामिल सभी जवानों के लिए तालियां बजायी. उन्होंने कई बार हाथ उठा-उठा कर बुलंद आवाज में सभी जवानों के साथ झारखंड पुलिस जिंदाबाद के नारे भी लगाये.
