खरसावां.
सरायकेला के महिला महाविद्यालय में युवा महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. कॉलेज की छात्राओं ने मिट्टी की हांडी एवं घड़ों पर रंग-बिरंगी और आकर्षक पेंटिंग कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया. महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. स्पार्कलीन देई ने पॉट पेंटिंग की पारंपरिक पृष्ठभूमि और मृद्भांड कला के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि यह कला परंपरा से चली आ रही एक सांस्कृतिक विरासत है, जो आज भी आधुनिक स्वरूप में जीवंत बनी हुई है. उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी आंतरिक क्षमताओं और रचनात्मक प्रतिभा को पहचानने का आह्वान किया. डॉ. देई ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं छात्रों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का सशक्त मंच प्रदान करती हैं. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आधुनिक युग में युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं. साथ ही, ये सांस्कृतिक कार्यक्रम छात्राओं में सृजनात्मकता और भारतीयता की भावना को प्रोत्साहित करते हैं. उन्होंने आगे कहा कि युवाओं को अपने विचारों, विश्वासों और ज्ञान के माध्यम से समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए तथा हमारी परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण की भावना के अनुरूप इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. मालूम हो कि विगत 10 जनवरी से सरायकेला के महिला कॉलेज में युवा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. युवा महोत्सव का समापन चार फरवरी को होगा. 20 को भाषण व गायन प्रतियोगिता, तीन फरवरी को रंगोली बनाओ प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी. साथ ही चार फरवरी को नृत्य व सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ साथ रैंप वॉक किया जायेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
