साल की डाली, मांदर की थाप और आदिवासी संस्कृति का रंग...ऐसे मना विश्व आदिवासी दिवस

कुचाई के बिरसा स्टेडियम में विश्व आदिवासी दिवस पर भाषा, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का संकल्प लिया गया. विधायक दशरथ गागराई ने शिक्षा पर जोर दिया.

खरसावां | साल की डाली गाड़कर पारंपरिक पूजा, मांदर की थाप पर गीत-संगीत और पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति... रविवार को कुचाई का बिरसा स्टेडियम आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया. विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाषा, साहित्य, संस्कृति और परंपरा को बचाने का संकल्प लिया गया. इस दौरान निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए. आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली.

दिउरी की पूजा से शुरू हुआ कार्यक्रम, गूंजे पारंपरिक गीत

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ हुई. बिरसा स्टेडियम परिसर में साल की डाली गाड़कर दिउरी ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. इसके बाद मंच पर आदिवासी गीत-संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां शुरू हुईं. पारंपरिक वेशभूषा में बच्चों और कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया. गीत-संगीत और नृत्य के बीच पूरा माहौल आदिवासी संस्कृति की रंगत से भर उठा.

शोभायात्रा में दिखी संस्कृति और परंपरा की झलक

कार्यक्रम के दौरान बिरसा स्टेडियम परिसर से शोभायात्रा निकाली गयी. इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए. पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के साथ निकली शोभायात्रा में आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली.

विधायक बोले- नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक दशरथ गागराई ने आदिवासी समाज के समग्र विकास पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने समाज के लोगों से अपने अधिकारों का बेहतर उपयोग करने और बच्चों को शिक्षित बनाने की अपील की. साथ ही अपनी संस्कृति, परंपरा, भाषा और लिपि के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया. विधायक ने सामाजिक एकजुटता के साथ सामाजिक समरसता का माहौल बनाये रखने की भी अपील की.

महापुरुषों को नमन कर लिया संरक्षण का संकल्प

कार्यक्रम की शुरुआत विधायक दशरथ गागराई, बासंती गागराई समेत अन्य अतिथियों ने महापुरुषों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर की. इस दौरान आदिवासी समाज की भाषा, साहित्य, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने का संकल्प लिया गया. मौके पर बासंती गागराई, भरत सिंह मुंडा, मान सिंह मुंडा, लखीराम मुंडा, पार्वती गागराई, धर्मेंद्र मुंडा, सोन लाल कुम्हार, मुन्ना सोय, वार्षा रानी बांकिरा, चंद्र मोहन मुंडा, राहुल सोय, लाल मुनी सामड़, मंगल सिंह मुंडा, लुदरी हेंब्रम, दशरथ उरांव, रमेश द्विवेदी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.


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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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