Seraikela Kharsawan News : परंपरा और आस्था का संगम बनी पदमपुर की काली पूजा

खरसावां. काली पूजा की भक्ति में डूबे श्रद्धालु, मंदिरों में उमड़ी भीड़

खरसावां. खरसावां के विभिन्न क्षेत्रों में काली पूजा की धूम मची है. लोग श्रद्धा और भक्ति के भाव से मां काली की आराधना में लीन हैं. 20 अक्तूबर की रात श्रद्धा और उल्लास के साथ आरंभ हुई यह पूजा 26 अक्तूबर तक चलेगी. पदमपुर स्थित मां काली मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना, हवन और आरती की जा रही है. सोमवार की रात बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा कर माता का आशीर्वाद लिया. मंगलवार को भी सुबह से देर शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रही. श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता से मन्नत मांगी और पूरा होने पर चढ़ावा अर्पित किया. पूजा समिति के अध्यक्ष सुब्रतो सिंहदेव ने बताया कि पदमपुर में मां काली की पूजा का यह परंपरागत आयोजन वर्ष 1897 से होता आ रहा है. 26 अक्तूबर की शाम प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा.

खरसावां के विभिन्न क्षेत्रों में काली पूजा का आयोजन:

खरसावां में मुख्य रूप से सरकारी काली मंदिर, पदमपुर, पांचगछिया, महालिमुरुप, कीता, बडाबांबो, बुढ़ीतोपा, और आमदा में मां काली की पूजा हो रही है. खरसावां के सरकारी काली मंदिर, महालिमुरुप, कीता और बड़ाबांबो में तांत्रिक विधि से ूजा-अर्चना की जा रही है, जबकि बुढ़ीतोपा, आमदा रेलवे कॉलोनी, आमदा ठाकुरबाड़ी पूजा पंडाल और पांचगछिया में वैष्णव विधि से मां काली की उपासना हो रही है.

पदमपुर में 128 साल से हो रही पूजा, आड़िया नाटक का होगा मंचन

खरसावां. पदमपुर (तेलीसाही) गांव में 21 अक्तूबर से प्रसिद्ध काली मेला की शुरुआत हो गयी है, जिसका समापन 26 अक्तूबर को होगा. यहां बीते 128 वर्षों से यह मेला परंपरागत रूप से आयोजित किया जा रहा है. कोल्हान के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी राज्यों ओडिशा और बंगाल से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. सात दिवसीय इस पूजा के दौरान हजारों लोग मां काली के दर्शन के लिए आते हैं. मेले में हर वर्ग के लोगों के मनोरंजन के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है. यहां नाव झूला, ड्रैगन झूला, चांद-तारा झूला, ब्रेज डांस झूला और थ्री-डी झूला सहित छोटे-बड़े कई तरह के झूले लगाये गये हैं. इसके साथ ही ओडिशा की नाट्य संस्थाओं द्वारा ओड़िया नाटकों का मंचन भी किया जायेगा. मेले में खरीदारी के लिए दर्जनों दुकानें सजी हैं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु और दर्शक शांति व उत्साह के साथ कार्यक्रमों का आनंद ले सकें.

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Author: ATUL PATHAK

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