Seraikela Kharsawan News : कास फूलों ने किया प्रकृति का शृंगार

सरायकेला-खरसावां के पहाड़ी क्षेत्र, नदी-तालाब के तट, खेतों के मेढ़ों से लेकर बांध पोखर, पगडंडियां इस समय कास (काशी) फूल की चादर ओढ़े हुए हैं.

By AKASH | September 11, 2025 11:18 PM

खरसावां.

सरायकेला-खरसावां के पहाड़ी क्षेत्र, नदी-तालाब के तट, खेतों के मेढ़ों से लेकर बांध पोखर, पगडंडियां इस समय कास (काशी) फूल की चादर ओढ़े हुए हैं. ऐसा लग रहा है मानों प्रकृति का शृंगार हो रहा है. युवा वर्ग कास फूलों के बीच रील्स बना रहे है. कास के फूल वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन का संकेत देते हैं. दुर्गा पूजा में कास के फूलों को विशेष महत्व है.

झारखंड के पर्व-त्योहार के साक्षी बनते हैं कास फूल

झारखंड में कास के फूल उत्सवों-परंपराओं का साक्षी बनते रहे हैं. बुरु (पहाड़ देवता) के पूजा में कास के फूलों का महात्म्य है. हो समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार मागे पर्व में नृत्य के दौरान कास के फूलों का उपयोग होता है. सितंबर में कास के फूलों को कागज में लपेट कर रखा जाता है. मागे नृत्य के दौरान इसका इस्तेमाल कर उड़ाया जाता है.

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