खरसावां: पहाड़ की तलहटी में बसे कुचाई के मेरमजंगा गांव में एक शिक्षक की पहल ने शिक्षा की तस्वीर बदल दी. वर्ष 2022 में उत्क्रमित उच्च विद्यालय मेरमजंगा में शिक्षक बृजेश्वर कुमार द्विवेदी की प्रतिनियुक्ति हुई, तब स्कूल में बच्चों की संख्या कम थी और नियमित उपस्थिति बड़ी चुनौती थी.
विद्यालय झोपड़ीनुमा दो कमरों में संचालित होता था. शिक्षक ने समस्या का इंतजार करने के बजाय अभिभावकों और ग्रामीणों से संवाद शुरू किया. ग्रामसभा की बैठक में उन्होंने बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने की अपील की. ग्रामीणों ने स्कूल भवन की खराब स्थिति को बड़ी बाधा बताया. इसके बाद शिक्षक ने अपने वेतन से स्कूल की मरम्मत करायी और छत पर एस्बेस्टस लगवाया. इससे ग्रामीणों का भरोसा बढ़ा और बच्चों की उपस्थिति में सुधार होने लगा.
28 से बढ़कर 207 हुआ नामांकन, शून्य ड्रॉपआउट
वर्ष 2022 में पहली से आठवीं कक्षा तक विद्यालय में महज 28 बच्चे नामांकित थे. शिक्षक ने स्कूल की व्यवस्था सुधारने के साथ पोषक क्षेत्र के गांवों में अभियान चलाया. वे घर-घर जाकर अभिभावकों से मिलते और शिक्षा के महत्व तथा नियमित उपस्थिति के प्रति जागरूक करते. लगातार प्रयासों का असर हुआ और बच्चों का विद्यालय से जुड़ाव बढ़ता गया. आज स्कूल में नामांकन बढ़कर करीब 207 हो गया है. मेरमजंगा का पोषक क्षेत्र शून्य ड्रॉपआउट बन चुका है.
पक्के भवन के साथ दसवीं तक हुई पढ़ाई
शिक्षक के प्रयासों के बाद जिला प्रशासन ने विद्यालय के लिए पक्का भवन बनवाया. पिछले वर्ष स्कूल में दसवीं कक्षा तक पढ़ाई शुरू हुई. विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और नियमित उपस्थिति को देखते हुए पांच अन्य शिक्षकों की भी पदस्थापना की गयी. कभी झोपड़ीनुमा दो कमरों से संचालित विद्यालय अब पक्के भवन और दसवीं तक की पढ़ाई तक पहुंच चुका है. हालांकि बढ़ते नामांकन को देखते हुए अतिरिक्त कमरों की जरूरत बनी हुई है. बृजेश्वर कुमार द्विवेदी की पहल ने दिखाया कि दुर्गम क्षेत्र में एक शिक्षक की प्रतिबद्धता पूरे गांव में शिक्षा के प्रति विश्वास पैदा कर सकती है.
