सरायेकला.
जिला वासियों और विकास कार्यों से जुड़े संवेदकों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा जारी नियम आगामी 10 जून से प्रभावी होने जा रहे हैं. ऐसे में इस बार भी जिले के बालू घाटों से चालान के साथ वैध बालू का उठाव नहीं हो पाएगा. कारण यह है कि जिले के जिन बालू घाटों की निविदा (टेंडर) हो भी चुकी है, वहां बालू उठाव के लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाएं अब तक पूरी नहीं की जा सकी हैं. इसके परिणामस्वरूप अब 15 अक्तूबर (एनजीटी की रोक समाप्त होने) के बाद ही घाटों से चालान के साथ बालू का उठाव संभव हो सकेगा. तब तक आम जनता से लेकर सरकारी विकास कार्य करने वाले संवेदकों को बालू के लिए पूरी तरह ””””बालू स्टॉक लाइसेंसधारियों”””” पर ही निर्भर रहना पड़ेगा.चांडिल अनुमंडल : 7 महीने पहले टेंडर के बावजूद कागजी प्रक्रिया अधूरी
जिला खनन विभाग ने करीब सात महीने पहले ही चांडिल अनुमंडल के स्वर्णरेखा और करकरी नदी के बालू घाटों की निविदा पूरी कर ली थी. टेंडर के बाद से ही आवश्यक कागजी कार्रवाई चल रही है. वर्तमान में खनन विभाग संबंधित गांवों में ग्राम सभा का आयोजन कर रहा है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व अन्य विभागों से एनओसी मिल सके. चूंकि 10 जून से एनजीटी का आदेश स्वतः प्रभावी हो जाएगा, इसलिए महज एक सप्ताह के भीतर यह सारी कागजी कार्रवाई पूरी करना असंभव है. इसे देखते हुए खनन विभाग अब 15 अक्तूबर के बाद ही घाटों से चालान जारी करने की तैयारी में है.जिला में 30 स्टॉक लाइसेंसधारी संभालेंगे कमान
जिले में निजी और सरकारी निर्माण कार्यों में वैध तरीके से बालू की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में 30 स्टॉक लाइसेंसधारी सक्रिय हैं. घाटों से उठाव बंद रहने के दौरान इन्हीं स्टॉकयार्ड्स से पूरे जिले में बालू की सप्लाई की जाएगी.एकमात्र जारगोडीह बालू घाट भी तकनीकी कारणों से बंद
अब तक जिले के एकमात्र स्वर्णरेखा नदी स्थित जारगोडीह बालू घाट से बालू का चालान मिल रहा था. इस घाट का संचालन जेएमडीसी द्वारा किया जा रहा था, लेकिन तकनीकी कारणों से फिलहाल यह घाट भी बंद हो गया है और यहां से चालान मिलना बंद है.ठेकेदार नहीं मिलने पर अब ””””सिंगल-सिंगल”””” निविदा की तैयारी
सरायकेला अनुमंडल के अंतर्गत खरकई नदी पर कई बालू घाट स्थित हैं. विभाग द्वारा कई बार इन घाटों का ग्रुप (कलस्टर) बनाकर निविदा निकाली गयी, लेकिन कोई भी निविदाकार (ठेकेदार) इन्हें लेने के लिए आगे नहीं आया. ठेकेदार न मिलने के कारण अब विभाग रणनीति बदलते हुए सभी बालू घाटों की सिंगल-सिंगल (एक-एक कर) निविदा निकालने की तैयारी कर रहा है.खरकई नदी के घाटों में बालू ही नहीं बची!
सरायकेला में खरकई नदी के अधिकतर बालू घाटों में ठेकेदारों की बेरुखी का एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां बालू बची ही नहीं है. पूर्व में ही इन घाटों से अत्यधिक उठाव के कारण बालू समाप्त हो चुकी है. अब घाटों पर नाममात्र की बालू बची है, जो व्यावसायिक रूप से फायदेमंद नहीं है.
क्या कहते हैं अधिकारी
जिले में बालू घाटों के संचालन को लेकर पूर्व में निविदा प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है. वर्तमान में ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं. इसके पश्चात अन्य आवश्यक कागजी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) प्राप्त किया जाएगा. इसके बाद ही बालू का उठाव शुरू हो सकेगा. एनजीटी के आदेश की अवधि समाप्त होने के बाद ही जिले में बालू उठाव का कार्य प्रारंभ किया जा सकेगा. हालांकि, जिले में वर्तमान आवश्यकता के अनुरूप स्टॉक में पर्याप्त मात्रा में बालू उपलब्ध है.-ज्योतिशंकर सतपथी, जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ), सरायकेला-खरसावां
