सरायकेला में जल संकट से राहत: हेंसल गांव की सोलर जलापूर्ति योजना बहाल, लंबे समय बाद नींद से जागा विभाग

Saraikela Water Crisis: सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत हेंसल लैंपस के सामने स्थित सोलर आधारित लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजना मरम्मत के बाद दोबारा शुरू हो गई है. कई दिनों से खराब पड़ी इस योजना की शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता कृतिवास मंडल ने भारत सरकार के पेयजल मंत्रालय से की थी, जिसके बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो मोटरों को ठीक कराकर आपूर्ति बहाल की.

Saraikela Water Crisis, सरायकेला (सुरेन्द्र मार्डी की रिपोर्ट): पेयजल संकट से जूझ रहे सरायकेला के हेंसल गांव को बड़ी राहत मिली है. केंद्र सरकार के हस्तेक्षेप के बाद से पेयजल एवं स्वच्छता अवर प्रमंडल, सरायकेला तत्काल हरकत में आया और कार्रवाई शुरू की. ज्ञात हो कि राजनगर प्रखंड अंतर्गत हेंसल गांव के ग्रामीणों को पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी के बीच पेयजल पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा था. हेंसल लैंपस के सामने जल जीवन मिशन के तहत स्थापित 16 हजार लीटर क्षमता वाली सोलर आधारित लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजना तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय से बंद पड़ी थी. ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर कई बार गुहार लगाई लेकिन विभागीय अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी. बाद में जब इसकी सूचना आरटीआई कार्यकर्ता संघ के केंद्रीय महासचिव सह आजसू पार्टी के जिला सचिव कृतिवास मंडल ने सीधे पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, भारत सरकार (नई दिल्ली) में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई तो केंद्र सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

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मरम्मत के बाद सुचारू हुई व्यवस्था

केंद्र सरकार और पेयजल विभाग के निर्देश पर कनीय अभियंता (राजनगर) एवं सहायक अभियंता ने तुरंत मौके पर पहुँचकर जांच की. इसके बाद मौके पर ही दोनों मोटरों की मरम्मत कराई. इसके बाद से जलापूर्ति योजना फिर से सुचारू रूप से चालू कर दिया गया. इस संबंध में विभाग द्वारा एक जांच प्रतिवेदन पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के निदेशक शिवजी नरसू पाटिल को भी प्रेषित किया गया है.

ग्रामीणों ने जताया आभार

जलापूर्ति बहाल होने से हेंसल गांव के ग्रामीणों में खुशी का माहौल है और अब उन्हें पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने इस समस्या के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाने वाले कृतिवास मंडल के प्रयासों की सराहना की है.

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Published by: Sameer Oraon

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