सरायकेला से प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट
Saraikela News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के जिला कारागार में रविवार को जेल अदालत, विधिक जागरूकता शिविर और चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया गया. यह शिविर रांची स्थित झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित किया गया. कार्यक्रम के आयोजन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री रामाशंकर सिंह और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मार्गदर्शन रहा.
जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं बंदी
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव तौसिफ मेराज ने की. उन्होंने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि जेल अदालत और विधिक जागरूकता शिविरों का उद्देश्य कैदियों को उनके कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना है. इस पहल से बंदियों में न्यायिक प्रक्रियाओं की समझ विकसित होती है और समाज में लौटने पर वे जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं.
चिकित्सा जांच का महत्व
कार्यक्रम के दौरान आयोजित चिकित्सा जांच के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि नियमित स्वास्थ्य जांच और प्राथमिक उपचार का जीवन में विशेष महत्व है. उन्होंने बंदियों को मोटर वाहन दुर्घटनाओं और संबंधित मुआवजा दावों के बारे में भी जानकारी दी. दुर्घटना में सामान्य और गंभीर चोटों के प्रकार, मुआवजा पाने की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी गई.
न्यायिक प्रक्रिया और गुड समैरिटन कानून
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि जिला स्तर पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मामलों की सुनवाई होती है. गुड समैरिटन कानून के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की मदद करने वाले नागरिकों को संरक्षण मिलता है. बंदियों को प्रेरित किया गया कि आवश्यक होने पर दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने में संकोच न करें क्योंकि समय पर मदद किसी की जान बचा सकती है.
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति और स्वास्थ्य परीक्षण
कार्यक्रम में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अनामिका किस्कू, सहायक लोक अभियोजक देव प्रताप तिवारी, डॉ धरम महेश्वर महाली, डॉ शुभम और सोनू कुमार, जेलर जिला कारागार सरायकेला उपस्थित रहे. चिकित्सा अधिकारियों ने बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति और कल्याण सुनिश्चित हुआ.
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महिला वार्ड का दौरा और समापन
कार्यक्रम के अंत में गणमान्य व्यक्तियों ने महिला वार्ड का दौरा किया और महिला बंदियों से बातचीत कर उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी. बंदियों से अपील की गई कि वे जेल से रिहा होने के बाद इस प्रकार की जानकारी समाज में फैलाएं और जागरूक नागरिक बनकर समाज में सकारात्मक योगदान दें. यह आयोजन बंदियों के विधिक और स्वास्थ्य कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिसने न्याय, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया.
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