कौन हैं सालगे टुडू.... जो झाड़ू मारकर बदल रही हैं हेंसल बाजार की तस्वीर......

पति की मौत के बाद पेंशन से वंचित सालगे टुडू बिना किसी मानदेय के हेंसल बाजार की सफाई कर स्वच्छता की मिसाल पेश कर रही हैं. जानें उनकी संघर्ष भरी कहानी.

राजनगर: स्वच्छता के लिए न कोई सरकारी आदेश, न मानदेय और न ही किसी संस्था का सहयोग. बस एक संकल्प ने राजनगर प्रखंड के हेंसल बाजार की तस्वीर ही बदल दी है. गोवर्धन गांव की रहने वाली और वर्तमान में हेंसल सिंचाई कॉलोनी में निवास करने वाली सालगे टुडू पिछले करीब दो महीने से रोजाना सुबह हाथ में झाड़ू थामकर बाजार पहुंचती हैं और घंटों साफ-सफाई करती हैं. उनके इस अथक प्रयास से अब हेंसल बाजार पहले की तुलना में काफी स्वच्छ और सुंदर दिखने लगा है.

स्वप्न से मिला जीवन का नया लक्ष्य

सालगे टुडू बताती हैं कि उन्हें एक रात सपना आया था कि “हेंसल बाजार को साफ-सुथरा रखो, सफाई के बदले जो भी मिले, उसे स्वीकार करो.” इस सपने को उन्होंने अपने जीवन का अहम आदेश मान लिया. इसके बाद से ही बाजार की सफाई को उन्होंने अपनी दैनिक दिनचर्या बना ली. वह रोज सुबह बिना किसी नागा के बाजार की गलियों और दुकानों के आसपास की सफाई करती हैं, जिससे पूरा इलाका अब चमकने लगा है.

अपनों की बेरुखी और पेंशन का संकट

पति बिक्रम टुडू के निधन के तीन साल बाद भी सालगे आर्थिक और कागजी परेशानियों से जूझ रही हैं. उनके पति सिंचाई विभाग में कार्यरत थे. बिक्रम की दो पत्नियां थीं, जिनमें सालगे बड़ी हैं जबकि टिम्पी टुडू छोटी पत्नी हैं. पति के निधन के बाद छोटी पत्नी को तो पेंशन मिल रही है, लेकिन सालगे आज भी इस लाभ से वंचित हैं. उनका आधार और वोटर कार्ड आज भी मायके राजनगर के बरसासाई पते पर है और राशन कार्ड भी वहीं जुड़ा हुआ है, जिस कारण उन्हें पारिवारिक पेंशन मिलने में अड़चन आ रही है. एक बेटा बेरोजगार है और दो बेटियों की शादी हो चुकी है.

प्रेरणास्त्रोत बना यह अनूठा प्रयास

परिवार की तमाम जिम्मेदारियों और संघर्षों के बावजूद सालगे के हौसले कम नहीं हुए हैं। उनका मानना है कि बाजार साफ रहने से लोग स्वस्थ रहेंगे और बीमारियों से बचाव होगा। उन्होंने दुकानदारों और खरीदारों से अपील की है कि वे कूड़ा-कचरा इधर-उधर न फेंकें। बिना किसी स्वार्थ के चलाया जा रहा सालगे का यह अभियान आज सरकारी स्वच्छता योजनाओं के बीच जन-जागरूकता की एक अनूठी मिसाल बन गया है।

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By Surendra mardi

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