सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश और प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट
Saints Pilgrimage: खरसावां से देश के प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थलों काशी, वृंदावन, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार से संतों का एक पवित्र जत्था भगवान जगन्नाथ धाम पुरी के दर्शन के लिए रवाना हुआ है. इस आध्यात्मिक यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है. बताया जा रहा है कि संतों का यह जत्था भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के साथ यात्रा कर रहा है. यात्रा के दौरान संत विभिन्न स्थानों पर रुककर पूजा-अर्चना और सत्संग भी करेंगे.
यात्रा में भक्ति और आध्यात्मिकता का विशेष माहौल
काशी, वृंदावन, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थस्थलों से निकले संतों की यह यात्रा पूरी तरह धार्मिक आस्था और भक्ति भाव से ओत-प्रोत है. संतों के साथ कई श्रद्धालु भी इस यात्रा में शामिल हैं, जो भगवान जगन्नाथ के दर्शन की कामना लेकर आगे बढ़ रहे हैं. यात्रा मार्ग में जगह-जगह स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा संतों के स्वागत की भी तैयारियां की जा रही हैं.
पुरी में भगवान जगन्नाथ के करेंगे दर्शन
संतों का यह जत्था ओडिशा के प्रसिद्ध तीर्थस्थल पुरी धाम पहुंचेगा, जहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन किए जाएंगे. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ के दर्शन को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. संतों के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की परंपराओं को आगे बढ़ाना और समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है.
वापसी में खरसावां के जगन्नाथ मंदिर में होगा दर्शन
जानकारी के अनुसार पुरी धाम में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के बाद लौटते समय संतों का यह जत्था 12 मार्च को सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां स्थित हरिभंजा जगन्नाथ मंदिर भी पहुंचेगा. यहां संतों द्वारा भगवान जगन्नाथ का दर्शन-पूजन किया जाएगा. संतों के आगमन की खबर से क्षेत्र के श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है और मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं.
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रामगढ़ में होगा संतों का रात्रि विश्राम और सत्संग
यात्रा के दौरान संतों का रात्रि विश्राम रामगढ़ स्थित श्री विद्या विनोद सिंहदेव के निवास पर होगा. यहां संतों के स्वागत की भव्य व्यवस्था की गई है. साथ ही इस अवसर पर सत्संग और भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है. श्रद्धालुओं का मानना है कि संतों की यह यात्रा आध्यात्मिक एकता और सनातन परंपरा का प्रतीक है. इससे समाज में धार्मिक चेतना और आस्था को और मजबूती मिलती है.
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