डीसी साहब! राजनगर के आधा दर्जन गांवों की पीसीसी सड़कें हो गई हैं जर्जर, कराएं मरम्मत

Seraikela News: सरायकेला के राजनगर प्रखंड में छोटाखीरी, टिटिडीह, बाना और गेंगेरूली गांवों को जोड़ने वाली जर्जर पीसीसी सड़क की मरम्मत की मांग ग्रामीणों ने जनता दरबार में उठाई. डीसी नितिश कुमार सिंह ने संबंधित अधिकारियों को जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

सरायकेला से प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट

Seraikela News: सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड के ग्रामीणों ने जर्जर सड़क की समस्या को लेकर जिला प्रशासन से गुहार लगाई है. जिला समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में आयोजित साप्ताहिक जनता दरबार में पहुंचे ग्रामीणों ने उपायुक्त नितिश कुमार सिंह को आवेदन सौंपकर छोटाखीरी, टिटिडीह, बाना और गेंगेरूली गांवों को जोड़ने वाली पीसीसी सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की. ग्रामीणों ने बताया कि सड़क काफी जर्जर हो चुकी है, जिससे लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है.

जर्जर सड़क से ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों ने कहा कि यह सड़क कई गांवों के लोगों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है. प्रतिदिन स्कूली बच्चे, किसान, मरीज और आम लोग इसी सड़क से आवागमन करते हैं. सड़क टूट जाने के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है. लोगों का कहना है कि कई जगह सड़क की सतह उखड़ चुकी है और गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों को काफी दिक्कत होती है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की ताकि लोगों को राहत मिल सके.

जनता दरबार में कई अन्य समस्याएं भी उठीं

साप्ताहिक जनता दरबार में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने भी अपनी समस्याओं को उपायुक्त के समक्ष रखा. लोगों ने जनहित और आधारभूत संरचना से जुड़े कई मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की. जनता दरबार में राजनगर प्रखंड के उच्च विद्यालय एदल में चहारदीवारी निर्माण कराने की मांग उठाई गई. इसके अलावा राजनगर स्थित खैरकोचा पुलिया निर्माण कार्य में तेजी लाने का भी अनुरोध किया गया.

भूमि बंदोबस्ती और चौकीदार बहाली का मामला भी पहुंचा

जनता दरबार में भारतीय सेना के दिवंगत जवान के आश्रित को आवंटित भूमि का बंदोबस्ती आदेश जारी करने की मांग भी रखी गई. वहीं चौकीदार बहाली प्रक्रिया में तेजी लाने को लेकर भी आवेदन दिया गया. लोगों ने बताया कि लंबे समय से कई मामले लंबित हैं, जिससे संबंधित परिवारों और अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

अतिक्रमण और जाम की समस्या पर भी शिकायत

आवेदनों में लाल बिल्डिंग चौक के समीप सर्विस रोड पर अतिक्रमण और जाम की समस्या का मुद्दा भी शामिल रहा. स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क किनारे अतिक्रमण होने से प्रतिदिन यातायात प्रभावित होता है और लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है. इसके अलावा गम्हरिया-कांड्रा क्षेत्र स्थित जर्जर बाजार भवन की मरम्मत कराने की भी मांग उठाई गई. ग्रामीणों ने कहा कि भवन की हालत खराब होने से व्यापारियों और ग्राहकों को परेशानी हो रही है.

तालाब सफाई और सड़क निर्माण की मांग

जनता दरबार में गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत जगन्नाथपुर-बलरामपुर के सार्वजनिक तालाब की सफाई कराने तथा दोनों गांवों को जोड़ने वाली सड़क पर पीसीसी निर्माण कराने की मांग भी की गई. इसके अलावा आदित्यपुर फुटबॉल मैदान स्थित रेड क्रॉस को आवंटित भवन से संबंधित आपत्ति का मामला भी उपायुक्त के समक्ष रखा गया.

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कई मामलों का मौके पर हुआ निष्पादन

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने जनता दरबार में प्राप्त आवेदनों की गंभीरता से सुनवाई की. कई मामलों का त्वरित निष्पादन मौके पर ही किया गया, जबकि शेष मामलों में संबंधित विभागीय अधिकारियों को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया. डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता से जुड़े मामलों का समय पर समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े.

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Published by: Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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