बिजली और पेयजल संकट पर सरायकेला के नगर पंचायत अध्यक्ष सख्त, महाप्रबंधक को लिखी चिट्ठी

Seraiekela News: सरायकेला में बिजली कटौती और पेयजल संकट को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाते हुए जेबीवीएनएल को शिकायत पत्र भेजा है. उन्होंने अनियमित बिजली आपूर्ति, जल संकट और विभागीय लापरवाही पर कार्रवाई की मांग की, चेतावनी दी कि जल्द सुधार नहीं हुआ तो जन आक्रोश बढ़ेगा. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Seraiekela News: झारखंड के सरायकेला में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था और गहराते पेयजल संकट को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने जमशेदपुर स्थित झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के महाप्रबंधक को विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. अध्यक्ष ने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के बार-बार बिजली कटौती से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है.

बिजली संकट से ठप पड़ी जलापूर्ति व्यवस्था

नगर पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि अनियमित विद्युत आपूर्ति के कारण सरायकेला में पेयजल संकट गहराता जा रहा है. पिछले एक सप्ताह से लोग पानी के लिए परेशान हैं, क्योंकि बिजली नहीं रहने से जलापूर्ति प्रणाली पूरी तरह प्रभावित हो गई है. उन्होंने इसे अत्यंत गंभीर स्थिति बताते हुए तत्काल समाधान की जरूरत पर जोर दिया.

कर्मियों की मनमानी और लापरवाही पर आरोप

मनोज कुमार चौधरी ने पीएसएस ऑपरेटरों और लाइनमैन पर मनमानी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बिना किसी तय योजना के कभी भी शटडाउन लेकर पूरे शहर की बिजली काट दी जाती है. इससे जनता में भारी आक्रोश है और विभाग को भी राजस्व नुकसान हो रहा है. मरम्मत कार्यों में भी लापरवाही बरती जा रही है, जिससे समस्याएं लंबित रहती हैं.

तकनीकी खामियों से बढ़ रही परेशानी

अध्यक्ष ने बताया कि वर्षों से लाइन ट्रिपिंग, तार टूटने और लो वोल्टेज की समस्या बनी हुई है. मुख्य विद्युत लाइन नदी, खेत और जंगल जैसे दुर्गम क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जिससे फॉल्ट होने पर मरम्मत कार्य विशेषकर रात में काफी कठिन हो जाता है. ट्रांसफार्मरों में तेल की कमी, ओवरलोडिंग और मेंटेनेंस की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

एक ही फीडर पर निर्भर पूरा शहर

उन्होंने यह भी कहा कि पूरे सरायकेला टाउन की बिजली आपूर्ति एक ही फीडर पर निर्भर है. इससे छोटी सी खराबी होने पर करीब 5000 परिवारों की बिजली एक साथ बाधित हो जाती है. वर्षों से अलग फीडर, एबी स्विच और पीएसएस स्टेशन में ब्रेकर लगाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

अव्यवस्थित नेटवर्क और निगरानी का अभाव

नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि बिजली लाइन व्यवस्था मकड़जाल की तरह उलझी हुई है. पीएसएस स्टेशनों में निगरानी की कमी है और अभियंता नियमित निरीक्षण नहीं करते. कुछ कर्मियों और भ्रष्ट मिस्त्रियों की मिलीभगत से स्थिति और खराब हो रही है, लेकिन इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है.

सरकार की छवि पर पड़ रहा असर

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संसाधन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर विभागीय लापरवाही से सरकार की छवि धूमिल हो रही है. यह स्थिति किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है और इसे तुरंत सुधारने की जरूरत है.

नहीं सुधरी व्यवस्था तो बढ़ेगा जन आक्रोश

अध्यक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बिजली और पेयजल संकट का समाधान नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जन आक्रोश बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न हालात की पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी.

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उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई शिकायत

मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत पत्र की प्रतिलिपि उपायुक्त सरायकेला-खरसावां, ऊर्जा विभाग के प्रबंध निदेशक एवं सचिव, कार्यपालक अभियंता और मुख्यमंत्री झारखंड को भी भेजी गई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस दिशा में ठोस कार्रवाई होगी और आम जनता को राहत मिलेगी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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