खरसावां/चाईबासा: एमआरएमए 2.0 के तहत कोल्हान प्रक्षेत्र के हाटगम्हरिया स्थित पायलट प्रोजेक्ट सेंटर में किसानों के लिए वैज्ञानिक तसर पालन पर तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसका उद्देश्य किसानों को तसर पालन की विभिन्न प्रक्रियाओं को वैज्ञानिक व व्यवस्थित तरीके से अपनाने के लिए प्रशिक्षित करना और ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ अभियान के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण तसर उत्पादन को बढ़ावा देना था. प्रशिक्षण में 50 से अधिक किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
अंडे की तैयारी से लार्वा स्थानांतरण तक दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को अंडे/डीएफएल की तैयारी, मदर मॉथ परीक्षण, ग्रेनेज के विसंक्रमण, वैज्ञानिक ब्रशिंग, लार्वा स्थानांतरण और ग्रेनेज की तैयारी समेत तसर पालन की विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी गयी. वैज्ञानिक-बी डॉ. दिव्या राजावत ने प्रशिक्षण को व्यावहारिक रूप से समझाते हुए पालन के प्रत्येक चरण की बारीकियों से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि सही समय, सावधानी और वैज्ञानिक तरीके से प्रत्येक प्रक्रिया अपनाने से स्वस्थ व गुणवत्तापूर्ण कोकून का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.
विभागीय सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील
पायलट परियोजना पदाधिकारी, राज्य रेशम विभाग सह जिला समन्वयक प्रदीप महतो ने किसानों को तसर पालन के दौरान उपलब्ध विभागीय सुविधाओं, सहायता और विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी. उन्होंने वैज्ञानिक तकनीक अपनाने और सरकारी सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाकर तसर उत्पादन बढ़ाने की अपील की.
कोकून के उचित मूल्य व विपणन की दी जानकारी
कच्चा माल बैंक, चाईबासा के सहायक सचिव राम मोहन प्रमाणिक ने कोकून की खरीद-बिक्री और न्यूनतम समर्थन मूल्य की अवधारणा की जानकारी दी. उन्होंने उचित मूल्य, कोकून विपणन और उत्पाद की बिक्री से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाया. विषय वस्तु विशेषज्ञ आरसी यादव ने वैज्ञानिक तसर पालन के अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किये और स्वच्छता, समयबद्धता व सावधानी पर जोर दिया. प्रशिक्षण में किसानों ने अपनी समस्याएं विशेषज्ञों के समक्ष रखीं और वैज्ञानिक तकनीक अपनाने की इच्छा जतायी.
