14 जुलाई को होगा नवयौवन दर्शन, नागा संन्यासियों की परंपरा व आस्था का अद्भुत संगम देखने उमड़ते हैं श्रद्धालुचांडिल. सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल में इस वर्ष भी भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा पूरे धार्मिक उल्लास और परंपरागत वैभव के साथ 16 जुलाई को निकलेगी. चांडिल स्थित श्री साधु बांध मठिया दशनामी नागा संन्यासी आश्रम से स्टेशन रोड स्थित मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) तक निकलने वाली इस रथयात्रा की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में है . इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए हर साल झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्य ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी श्रद्धालु चांडिल पहुंचते हैं.
14 जुलाई को होगा नवयौवन दर्शनरथयात्रा से पहले 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा का ''नवयौवन (नवजीवन) दर्शन'' कराया जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवस्नान पूर्णिमा के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और 14 दिनों तक एकांतवास में रहकर औषधीय उपचार ग्रहण करते हैं. इसके बाद वे नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं. इस विशेष अवसर पर आश्रम में पूजा-अर्चना, महाआरती और महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा.
तीन अलग-अलग भव्य रथों पर निकलेंगे भगवान16 जुलाई को नगर भ्रमण के दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीन अलग-अलग भव्य रथों पर सवार होंगे. सबसे आगे भगवान जगन्नाथ का रथ रहेगा. बीच में देवी सुभद्रा का रथ चलेगा. सबसे पीछे भगवान बलभद्र का रथ विराजमान रहेगा. श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ रस्सियां खींचकर इन रथों को मौसीबाड़ी तक पहुंचाएंगे.
नागा संन्यासियों की अनूठी परंपराचांडिल की इस रथयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका संचालन दशनामी नागा संन्यासी आश्रम द्वारा किया जाता है. अंग्रेजी शासनकाल में यहां महज एक ही रथ पर तीनों विग्रहों की यात्रा निकलती थी. लेकिन वर्ष 1980 में ब्रह्मलीन महंत परमानंद सरस्वती ने जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर तीन अलग-अलग रथों की शुरुआत की. वर्तमान में जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत विद्यानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में यह परंपरा और भी भव्य हो चुकी है. आश्रम के महंत इंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि रथों के रंग-रोगन और मरम्मत का कार्य लगभग पूरा हो चुका है. उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से 14 जुलाई को नवयौवन दर्शन और 16 जुलाई को रथयात्रा में शामिल होकर महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है.
