खरसावां से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
‘जाको राखे साइयां, मार सके नाम कोय.’ यह कहावत सोमवार को उस समय सच साबित हुई, जब झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले में खरसावां प्रखंड के टोला फुचुडुंगरी के एक बुजुर्ग पर आकाशीय बिजली गिर गई. यह घटना तब हुई, जब वे घर के जलावन की लकड़ी लाने के लिए जंगल गए हुए थे . वज्रपात की चपेट में आने से वे गंभीर रूप से घायल तो हो गए, लेकिन उनकी जान बच गई. यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. फिलहाल, उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है.
शाम के वक्त हुआ हादसा
घटना सोमवार देर शाम करीब 7 बजे की बताई जा रही है. खरसावां प्रखंड की जोरडीहा पंचायत के फुचुडुंगरी गांव निवासी 70 वर्षीय सीताराम कुंटिया अपने घर के पीछे जंगल में जलावन की लकड़ी लाने गए थे. इसी दौरान अचानक मौसम बदला और तेज गरज के साथ वज्रपात हुआ. देखते ही देखते बिजली सीधे उन पर गिर गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए.
तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया
घटना के बाद आसपास मौजूद लोग और परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए घायल बुजुर्ग को तुरंत कुचाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया. वहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों के अनुसार, बुजुर्ग की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा गया है.
पुआल के ढेर में भी लगी आग
वज्रपात की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घर के बाहर रखे दो पुआल के ढेर में भी आग लग गई. आग इतनी भीषण थी कि वह रातभर सुलगती रही और मंगलवार सुबह तक जलती रही. ग्रामीणों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक पुआल पूरी तरह जलकर राख हो चुका था.
हजारों का हुआ नुकसान
पीड़ित परिवार के अनुसार, इस घटना में करीब 50 हजार रुपये का नुकसान हुआ है. पुआल के जल जाने से पशुओं के चारे की समस्या भी खड़ी हो गई है. इस नुकसान ने परिवार की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि ग्रामीण जीवन में पुआल का विशेष महत्व होता है.
जनप्रतिनिधि ने लिया जायजा
घटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगबंधु महतो मौके पर पहुंचे और पूरे हालात का जायजा लिया. उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया. साथ ही अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू को घटना की जानकारी देकर आपदा प्रबंधन के तहत सहायता दिलाने की मांग की.
प्रशासन से मदद की उम्मीद
स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार को अब प्रशासन से आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है. इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सरकार की योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन समय पर मदद मिलना बेहद जरूरी होता है.
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सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि मौसम खराब होने पर जंगल या खुले स्थानों में जाने से बचना चाहिए. वज्रपात जैसी घटनाएं अचानक होती हैं और जानलेवा साबित हो सकती हैं. सतर्कता और सावधानी ही ऐसे खतरों से बचने का सबसे बेहतर उपाय है.
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