खरसावां छऊ के गुरु कामाख्या प्रसाद षाड़ंगी का निधन, कला जगत में शोक

खरसावां शैली के प्रसिद्ध छऊ गुरु और शिक्षाविद कामाख्या प्रसाद षाड़ंगी का 88 वर्ष की आयु में निधन. कला और शिक्षा जगत में शोक की लहर.

खरसावां. खरसावां की शिक्षा, भाषा, कला और संस्कृति जगत के लिए रविवार का दिन बड़ी क्षति लेकर आया. खरसावां शैली के छऊ गुरु, नाट्य निर्देशक और शिक्षाविद कामाख्या प्रसाद षाड़ंगी अब हमारे बीच नहीं रहे. करीब 88 वर्ष की उम्र में जमशेदपुर के टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में उन्होंने अंतिम सांस ली. पिछले कुछ दिनों से वे बीमार चल रहे थे. उनके निधन की खबर फैलते ही कुम्हारशाही स्थित उनके आवास पर लोगों का तांता लग गया. टीएमएच से पार्थिव शरीर पहुंचते ही कला प्रेमियों और विभिन्न वर्ग के लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किये. इसके बाद सोना नदी तट स्थित श्मशान घाट पर उनके बड़े पुत्र सुशांत षाड़ंगी ने मुखाग्नि दी.

खरसावां छऊ के लिए कई नृत्य तालों की रचना की

गुरु कामाख्या प्रसाद षाड़ंगी ने राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय, खरसावां के प्राचार्य के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया. शिक्षा के साथ-साथ ओड़िया नाटक और खरसावां शैली के छऊ नृत्य उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे. उन्होंने खरसावां शैली के छऊ के लिए कई नृत्य तालों की रचना की. अपनी प्रस्तुतियों में नृत्य, भाव व लय का अद्भुत मेल दिखाया.

80 से अधिक ओड़िया नाटकों में किया काम

इसके अलावा, महावीर संघ ओपेरा से जुड़कर उन्होंने 80 से अधिक ओड़िया नाटकों में अभिनय और दर्जनों नाटकों का सफल निर्देशन किया, जिससे ग्रामीण परिवेश में रंगमंच को एक नयी पहचान मिली.

गणमान्य लोगों ने दी श्रद्धांजलि

उनके निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, विधायक दशरथ गागराई, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा समेत कई गणमान्य लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है. सभी ने इसे खरसावां की सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.


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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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