संवाददाता, खरसावां
सावन माह के अवसर पर करीब दो दर्जन से अधिक शिवभक्त सोमवार को 115 किलोमीटर की पैदल कांवर यात्रा कर पश्चिमी सिंहभूम के ओडिशा बोर्डर स्थित रामतीर्थ से खरसावां के रामगढ़ पहुंचे. यहां श्रद्धालुओं ने रामगढ़ शिव मंदिर के साथ बाजारसाही स्थित शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का बैतरणी नदी के पवित्र जल से जलाभिषेक किया. कांवरियों का दल शुक्रवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के ओडिशा सीमा पर स्थित रामतीर्थ से रवाना हुए. रामतीर्थ में पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने वैतरणी नदी से पवित्र जल भरा और पैदल यात्रा शुरू की. करीब 115 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी करने के बाद कावरियों ने सोमवार को खरसावां पहुंचकर जल अर्पित किया. 1987 से जारी है कांवर यात्रा की परंपरा कांवरियों ने बताया कि रामतीर्थ से रामगढ़ तक कांवर यात्रा की परंपरा वर्ष 1987 से लगातार चली आ रही है. प्रत्येक वर्ष सावन माह में श्रद्धालु रामतीर्थ पहुंचकर बैतरणी नदी का जल लेकर पैदल रामगढ़ आते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. कठिन यात्रा के बावजूद श्रद्धालुओं में आस्था और उत्साह बना रहता है. कठिन मानी जाती है 115 किमी की पैदल यात्रा रामतीर्थ से रामगढ़ तक की लगभग 115 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा श्रद्धा, आस्था और धैर्य की परीक्षा मानी जाती है. इस यात्रा के दौरान रास्ते में श्रद्धालुओं के लिये किसी तरह की खास सुविधा नहीं रहती है. इस कारण रामतीर्थ से रामगढ़ की कांवर यात्रा को काफी कठिन माना जाता है. यात्रा के दौरान श्रद्धालु विभिन्न पड़ावों पर विश्राम करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं. रामतीर्थ का धार्मिक महत्व मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम, मां सीता और लक्ष्मण रामतीर्थ पहुंचे थे. वैतरणी नदी के तट पर विश्राम करने के बाद भगवान राम ने स्वयं यहां शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की पूजा की. इससे ही रामतीर्थ का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है और सावन माह में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जल भरने व पूजा करने पहुंचते हैं.
