प्रतिनिधि, सरायकेलाझारखंड शिक्षा परियोजना के अंतर्गत बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता में वित्तीय अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है. विभाग द्वारा बिना कोई कोटेशन या टेंडर आमंत्रित किए नियमों को ताक पर रखकर एक चहेते वेंडर को ₹2.70 लाख का कार्य आवंटित करने का आरोप लगा है. मामला सामने आते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिये हैं और दोषी अधिकारी पर कार्रवाई करने की बात कही है.
क्या है पूरा मामलाशिक्षा विभाग द्वारा सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए जिला स्तरीय सुब्रतो कप प्रतियोगिता के लिए किसी अन्य वेंडर से कोटेशन नहीं मांगा गया. बिना किसी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के सीधे एक ही वेंडर को ₹2,70,000 (दो लाख सत्तर हजार) का काम सौंप दिया गया. इस मामले के उजागर होने के बाद खेल आयोजन का जिम्मा संभालने वाले विभागीय पदाधिकारियों की भूमिका भी गंभीर सवालों के घेरे में आ गयी है. इस संबंध में जब विभाग से संपर्क किया गया, तो कोटेशन से जुड़ा कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका.
1 जुलाई को हुई थी जिला स्तरीय प्रतियोगितासुब्रतो कप का विद्यालय स्तरीय आयोजन 16 से 20 जून तक और प्रखंड स्तरीय आयोजन 23 से 30 जून तक किया गया था. वहां से चयनित खिलाड़ियों के लिए 1 जुलाई को जिला स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की गयी. सभी प्रखंडों को प्रतियोगिता आयोजन के लिए ₹35,000 तथा खेल पोशाक व पंजीकरण के लिए ₹30,000 (कुल ₹65,000 प्रति प्रखंड) के हिसाब से कुल ₹5,80,000 आवंटित किए गए थे. जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए प्रति प्रखंड ₹30,000 की दर से कुल ₹2,70,000 का आवंटन प्राप्त हुआ था, जिसमें यह गड़बड़ी सामने आयी है.
क्या कहता है नियमसुब्रतो कप का आयोजन वायु सेना द्वारा खेल मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया जाता है. नियम के अनुसार, वेंडर के पास पर्याप्त मात्रा में कुर्सियां, कनात, गद्दे, स्टेज फ्रेमवर्क और साउंड सिस्टम का अपना खुद का स्टॉक होना अनिवार्य है. स्पोट् र्स जर्सी और किट आपूर्ति के लिए कपड़े खेल के अनुकूल (जैसे ड्राई-फिट फैब्रिक) होने चाहिए. जर्सी पर तय मानकों के तहत फ्रंट राइट साइड में ''सुब्रतो लोगो'' और बैक पर नंबर प्रिंटिंग अनिवार्य होती है. तकनीकी बोली खोलते समय अधिकारियों के सामने कपड़ों और बूट्स का सैंपल पास कराना होता है.
जिम्मेदार अधिकारी बोले \"विगत वर्ष हुए खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जिस वेंडर ने सामग्री की आपूर्ति की थी, उसी को सुब्रतो कप की जिला स्तरीय प्रतियोगिता की व्यवस्थाओं के लिए वेंडर नियुक्त किया गया था.
-प्रमोद जायसवाल, एपीओ, शिक्षा परियोजना (सरायकेला-खरसांवा)
नियमानुसार टेंडर की प्रक्रिया होनी चाहिए थी, लेकिन नहीं हो पायी. कम से कम कोटेशन लेकर ही काम किया जाना था. पूरे मामले की फाइल मंगाई गयी है. यदि बिना कोटेशन लिए वेंडर की नियुक्ति हुई है, तो इसकी जांच की जाएगी. दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई होगी और वेंडर के भुगतान (विपत्र) पर रोक लगायी जायेगी.-कैलाश मिश्रा, जिला शिक्षा पदाधिकारी (सरायकेला-खरसांवा)
