Seraikela Kharsawan News : आरक्षण को नहीं, संस्कृति बचाने के लिए लड़ाई : अजीत

आदिवासी कुड़मी समाज ने रविवार को सीनी मोड़ के समीप बैठक कर 20 सितंबर को आयोजित होने वाले रेल रोको आंदोलन को सफल बनाने पर विचार-विमर्श किया

सरायकेला. आदिवासी कुड़मी समाज ने रविवार को सीनी मोड़ के समीप बैठक कर 20 सितंबर को आयोजित होने वाले रेल रोको आंदोलन को सफल बनाने पर विचार-विमर्श किया. बैठक में गम्हरिया से चक्रधरपुर के बीच पांच जगह पर आंदोलन करने का निर्णय लिया गया. मौके पर संयोजक अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि 20 सितंबर को झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के 100 जगहों पर आयोजित होने वाला रेल रोको आंदोलन केवल विरोध नहीं, बल्कि हमारी आदिवासी अस्मिता, इतिहास और न्याय की पुनःस्थापना का महासंग्राम है.

राजनीतिक साजिश से कुड़मी समाज को एसटी सूची से हटाया :

उन्होंने कहा कि आज एसटी सूची में शामिल होने की मांग सिर्फ आरक्षण का सवाल नहीं है, बल्कि यह हमारी पहचान, हमारी भाषा, हमारे पर्व और हमारी संस्कृति को बचाने की जंग है. उनका कहना था कि एक राजनीतिक साजिश के तहत 6 सितंबर 1950 को कुड़मी समाज को एसटी सूची से हटा दिया गया, लेकिन कानून और इतिहास दोनों इस बात के गवाह हैं कि हम आदिवासी थे, हैं और रहेंगे. सीएनटी एक्ट आज भी कुड़मी समाज पर लागू है, जो इस तथ्य का जीता-जागता प्रमाण है कि सरकार और कानून ने हमेशा हमें आदिवासी माना है.

विरोध करने वाले लोग अवसरवादी नेता हैं :

अजीत महतो ने कहा कि आज जो लोग विरोध कर रहे हैं, वे असली आदिवासी संगठन नहीं हैं, बल्कि स्वार्थी व्यक्ति और अवसरवादी नेता हैं. ये लोग जनता को गुमराह करके अपना राजनीतिक करियर चमकाना चाहते हैं. झारखंड अलग राज्य इसी उद्देश्य से बना था कि यहां के आदिवासी और मूलवासी अपनी अस्मिता और सम्मान के साथ जीवन जी सकें. कुड़मी समाज ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर झारखंड आंदोलन तक अनगिनत बलिदान दिए, लेकिन आज तक उन्हें उनका हक नहीं मिला.

कुड़मी को एसटी में शामिल करने के विरोध में प्रदर्शन आठ को

चांडिल डैम स्थित शीश महल में रविवार को आदिवासी सामाजिक संगठन की बैठक जयराम सिंह सरदार की अध्यक्षता में हुई. बैठक में आदिवासी समाज के विकास को लेकर चर्चा हुई. इस दौरान आगामी आठ अक्तूबर को सुबह 11 बजे चांडिल अनुमंडल कार्यालय परिसर में आदिवासियों के संरक्षण, अस्मिता व पहचान के लिए धरना पर बैठने का निर्णय लिया गया. धरना में चांडिल, नीमडीह, ईचागढ़, कुकड़ू, बोड़ाम, पटमदा, सरायकेला आदि क्षेत्र से आदिवासी समाज को लोग शामिल होंगे.

ये हैं मुख्य मांगें : झारखंड सरकार द्वारा पेसा अधिनियम 1996 लागू कराने, नगर निगम रद्द कराने, केंद्र सरकार द्वारा घोषित जातीय जनगणना के संबंध व कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के विरोध में प्रदर्शन किया जायेगा. मौके पर सुधीर किस्कू, रवींद्र सरदार, जयनाथ सिंह, सूर्या मुर्मू, रवींद्रनाथ सिंह, बाबूराम सोरेन, सूदन टुडू, बुद्धेश्वर सोरेन, राधेश्याम सिंह आदि उपस्थित थे.

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Author: ATUL PATHAK

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