सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela Kharsawan News: पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, सरायकेला द्वारा संचालित ‘चुप्पी तोड़ो-स्वस्थ रहो’ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उप विकास आयुक्त रीना हांसदा की अध्यक्षता में एक वर्चुअल समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में अभियान को सफल बनाने और माहवारी स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता फैलाने के लिए अलग-अलग दिशा-निर्देश जारी किए गए.
प्रखंड स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश
उप विकास आयुक्त ने सभी प्रखंडों को निर्देश दिया कि प्रखंड स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर पदाधिकारियों, कर्मियों, पंचायत प्रतिनिधियों और जलसहियाओं को अभियान के उद्देश्यों और गतिविधियों से अवगत कराया जाए. साथ ही प्रखंड जल और स्वच्छता समिति की बैठक आयोजित कर अभियान के सफल संचालन के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया. बैठक में पंचायत और ग्राम स्तर पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने, किशोरियों और महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने और गांव स्तर पर स्थापित भस्मक (इन्सिनरेटर) के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया.
माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
अधिकारियों ने माहवारी स्वच्छता से जुड़े मिथकों, संकोच और सामाजिक वर्जनाओं को समाप्त करने के लिए सामूहिक कोशिशों की जरूरत बताई. डीडीसी रीना हांसदा ने कहा कि माहवारी स्वच्छता केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं और किशोरियों के सम्मान, गरिमा और सशक्तिकरण से भी जुड़ा है. उन्होंने विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने और अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. बैठक में कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, जिला एवं प्रखंड समन्वयक (एसबीएम/जेजेएम) सहित अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे. इसी क्रम में पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, सरायकेला कार्यालय परिसर में कार्यपालक अभियंता की अध्यक्षता में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
अधिकारियों और कर्मियों को दिलाई गई स्वच्छता शपथ
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और कर्मियों को माहवारी स्वच्छता शपथ दिलाई गई तथा रेड डॉट चैलेंज के माध्यम से जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया गया. कार्यक्रम में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन को महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान एवं सशक्तिकरण से जोड़ते हुए इसे जन आंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया गया. साथ ही सभी प्रतिभागियों से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जागरूकता फैलाने और स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया.
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