चांडिल : चांडिल डैम परियोजना से विस्थापन के 44 वर्ष बाद भी अधिकार और पुनर्वास की लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. लंबित समस्याओं और अपने अधिकारों को लेकर विस्थापित एक बार फिर संगठित होने की तैयारी में हैं. इसी कड़ी में शनिवार को नया आईबी स्थित द गोल्डन व्यू रिजॉर्ट में चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच की समीक्षा बैठक हुई.
अब इन गांवों तक पहुंचेगा ग्रामीण संवाद
बैठक में 25 से 27 अगस्त तक आयोजित ग्रामीण संवाद यात्रा के प्रथम चरण की समीक्षा की गई. साथ ही ग्रामीणों के बीच संवाद को आगे बढ़ाते हुए यात्रा का दूसरा चरण जारी रखने का निर्णय लिया गया. दूसरे चरण में ईचागढ़ के शेष विस्थापित गांवों के अलावा नीमडीह, कुकड़ू और चांडिल प्रखंड के विस्थापित गांवों का दौरा किया जाएगा. साथ ही 13 पुनर्वास स्थलों पर पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया जाएगा.
विस्थापित परिवारों की ली जाएगी राय
यात्रा के दौरान विस्थापित परिवारों की समस्याओं, अधिकारों और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों की जानकारी जुटाने के साथ उनकी राय भी ली जाएगी. संगठन का उद्देश्य गांवों में संवाद के जरिए विस्थापितों को एक मंच पर लाना और उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाना है. बैठक में वक्ताओं ने कहा - चांडिल डैम परियोजना के कारण विस्थापन के 44 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन बड़ी संख्या में विस्थापित आज भी अपने अधिकारों और उचित पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वक्ताओं ने कहा - विस्थापितों की लंबित समस्याओं को लेकर संगठन को और मजबूत करना जरूरी है. ग्रामीण संवाद यात्रा के माध्यम से अलग-अलग गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति समझी जाएगी और इसके बाद सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तैयार की जाएगी.
रैली से विधानसभा घेराव तक, आगे की रणनीति पर होगा फैसला
ग्रामीण संवाद यात्रा पूरी होने के बाद सभी विस्थापित संगठनों और ग्रामीणों की सामूहिक बैठक आयोजित की जाएगी. इसी बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी. जरूरत पड़ने पर रैली, धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल और विधानसभा घेराव जैसे लोकतांत्रिक कार्यक्रमों पर भी निर्णय लिया जा सकता है. बैठक में राकेश रंजन महतो, अंबिका यादव, श्यामल मार्डी, नारायण गोप, विवेक सिंह बाबू, अवधेश मुर्मू, विष्णु महापात्र, वीर सिंह सोरेन, हरे कृष्णा महतो, कृष्ण कालिंदी समेत कई लोग उपस्थित रहे.
