बिरसा उद्यान में प्रतिमा और स्टेडियम में भूमिपूजन पर मुंडा समाज ने जतायी आपत्ति, आंदोलन की दे चेतावनी

सरायकेला में बिरसा मुंडा उद्यान और स्टेडियम के नाम से छेड़छाड़ का आरोप, मुंडा समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी। जानिए पूरा मामला और प्रशासन की प्रतिक्रिया।

सरायकेला : भगवान बिरसा मुंडा से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की मूल पहचान और स्वरूप में कथित छेड़छाड़ का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. आदिवासी मुंडा समाज, झारखंड के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को सरायकेला उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा. उपायुक्त के मुख्यालय में मौजूद नहीं रहने पर प्रतिनिधिमंडल ने कार्यालय प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर मामले में उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की.

ऐतिहासिक स्थलों की मूल पहचान में बदला‍ का विरोध

समाज ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी महापुरुष या शहीद से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक स्थलों की मूल पहचान में बदलाव से है. संगठन ने सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर पूरे कोल्हान प्रमंडल में व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है. भगवान बिरसा मुंडा उद्यान में सिदो-कान्हू की प्रतिमा लगाने पर आपत्ति संगठन के रामू सरदार ने आरोप लगाया कि डीसी आवास के सामने स्थित उद्यान की ऐतिहासिक पहचान से छेड़छाड़ की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि सरकारी अभिलेख और नगर पंचायत के रिकॉर्ड में यह स्थल अब भी ‘भगवान बिरसा मुंडा उद्यान, शिलान्यास’ के नाम से दर्ज है.

सिदो-कान्हू के नाम पर पार्क के निर्माण की मांग

इसके बावजूद उद्यान परिसर में सिदो-कान्हू की प्रतिमा स्थापित किये जाने पर समाज ने आपत्ति जतायी है. संगठन का कहना है कि उद्यान का नाम और उसकी मूल पहचान बरकरार रखी जानी चाहिए. साथ ही सिदो-कान्हू के नाम पर अलग से भव्य पार्क का निर्माण किया जाना चाहिए. बिरसा स्टेडियम में शिबू सोरेन की प्रतिमा के भूमिपूजन पर भी विरोध समाज ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा स्टेडियम परिसर में दिशोम गुरु स्व. शिबू सोरेन की प्रतिमा के भूमिपूजन को लेकर भी आपत्ति जतायी है.

सात दिनों का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

आदिवासी मुंडा समाज ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों, आरोपियों तथा कथित साजिशकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. संगठन ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग भी की. समाज ने चेतावनी दी कि सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे कोल्हान प्रमंडल में व्यापक आंदोलन किया जाएगा. इसके तहत उपायुक्त कार्यालय का घेराव और चक्का जाम जैसे कार्यक्रम किये जाने की बात कही गयी है.

राज्यपाल से लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक भेजा ज्ञापन

संगठन के अनुसार, ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग समेत 14 स्थानों पर भेजी जाएगी. समाज ने प्रशासन से विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच कर ऐतिहासिक स्थलों की मूल पहचान और विरासत को सुरक्षित रखने की मांग की है.

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लेखक के बारे में

By प्रताप कुमार मिश्रा

प्रताप कुमार मिश्रा वर्ष 2003 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने कोल्हन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है. राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, खेल की खबरों में इन्हें विशेषज्ञता हासिल है. डिजिटल जर्नलिज्म में 10 साल का अनुभव है.

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