संवाददाता, खरसावां खरसावां, सरायकेला व आस- पास के ओडि़या बहुल क्षेत्रों में रविवार को पहली रोजों की धूम रही. दो दिवसीय रोजो पर्व (संक्रांति) के पहले दिन खरसावां कुचाई के करीब आधा दर्जन गांवों में मेला का भी आयोजन किया गया. रोजों संक्रांति पर महिलाओं द्वारा रस्सी से पारंपरिक झूला तैयार कर झूला झूलने की वर्षों पुरानी परंपरा को पूरा किया गया. महिलाओं द्वारा पेड़ों में रस्सी लगा कर झूला बनाने व झूला को विभिन्न तरह के फूलों से सजा कर झूलने की परंपरा का निर्वाह किया गया. झूला झूलते वक्त विशेष तौर से बनाये गये रोजों गीत को भी गाया गया. आषाढ़ माह के आगमन पर मॉनसून के स्वागत में ओडि़या समुदाय के लोग इस त्योहार को मनाते है. इस मौके पर घरों में विशेष पकवान भी बनाये गये थे. ओडि़या घरों में उदड़ की दाल व चावल से तैयार किया गया पीठा बनाया गया था. इस मौके पर घरों में विशेष रुप से चावल के पावडर से अल्पना भी बनाया गया. सोमवार को रोजों पर्व का समापन किया जायेगा.
खरसावां पहली रोजों की रही धूम
संवाददाता, खरसावां खरसावां, सरायकेला व आस- पास के ओडि़या बहुल क्षेत्रों में रविवार को पहली रोजों की धूम रही. दो दिवसीय रोजो पर्व (संक्रांति) के पहले दिन खरसावां कुचाई के करीब आधा दर्जन गांवों में मेला का भी आयोजन किया गया. रोजों संक्रांति पर महिलाओं द्वारा रस्सी से पारंपरिक झूला तैयार कर झूला झूलने की […]
