– रजो संक्रांति को साल का पहला पर्व माना जाता है- मॉनसून के स्वागत में आयोजित होता है रजोत्सला – दो दिनों तक नहीं होता है कृषि कार्य- रजोत्सला संक्रांति पर धरती मां करती है विश्राम13केएसएन 2 : रजो संक्रांति के मौके पर झूला झूलती एक बच्ची (फाईल फोटो)संवाददाता, खरसावां ओडि़या पंचाग के अनुसार साल का पहला महत्वपूर्ण पर्व है रजोत्सला संक्रांति है. तीन दिनों तक चलने वाली रजो पर्व में महिलाओं के झूला झूलने की वर्षों पुरानी परंपरा है. सरायकेला-खरसावां जिला के ओडि़या बहुल गांवों में यह परंपरा अब भी कायम है. पेड़ों में रस्सी लगा कर झूला बनाने व झूला को विभिन्न तरह के फूलों से सजा कर झूलने की परंपरा है. इस मौके पर विशेष तौर से रजो गीत भी तैयार किया जाता है. महिलाएं व युवतियां झूला झूलने के दौरान सामूहिक रुप से गीत गा कर इस पर्व को मनाती है. आषाढ़ माह के आगमन पर मॉनसून के स्वागत में ओडि़या समुदाय के लोग इस त्योहार को मनाते है. किंवदंती के अनुसार रजोत्सला संक्रांति के मौके पर धरती मां विश्राम करती है. इस दौरान किसी तरह का कृषि कार्य नहीं होता है. इस मौके पर घरों में विशेष पकवान भी बनाये जाते है. इस मौके पर घरों में विशेष रुप से चावल के पावडर से अल्पना भी तैयार की जाती है. रविवार व सोमवार को क्षेत्र में रजो संक्रांति का त्योहार मनाया जायेगा. खरसावां-सरायकेला में रजोत्सला संक्रांति के मौके पर देहरीडीह, रामपुर, गितीलोता, कुचाई के सेरेंगदा, मरांगहातु व जुगीडीह समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों में छऊ नृत्य व मेला का भी आयोजन किया जायेगा.
... हुओ साजो बाजो, बरसकु थोरे आसे रे रजो
– रजो संक्रांति को साल का पहला पर्व माना जाता है- मॉनसून के स्वागत में आयोजित होता है रजोत्सला – दो दिनों तक नहीं होता है कृषि कार्य- रजोत्सला संक्रांति पर धरती मां करती है विश्राम13केएसएन 2 : रजो संक्रांति के मौके पर झूला झूलती एक बच्ची (फाईल फोटो)संवाददाता, खरसावां ओडि़या पंचाग के अनुसार साल […]
