seraikela kharsawan news: यूजी परीक्षा 24 अप्रैल से, प्राचार्य नहीं रहने से अटके 3,000 एडमिट कार्ड

सरायकेला. प्राचार्य के 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने के बाद काशी साहू के वित्तीय कार्य ठप पड़ गये

-किसी को प्रभार नहीं मिलने से शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मियों का वेतन व मानदेय भुगतान प्रभावित

सरायकेला.

काशी साहू महाविद्यालय विगत 16 दिनों से बगैर प्राचार्य के संचालित हो रहा है. महाविद्यालय में प्राचार्य के न होने व वित्तीय प्रभार किसी को प्राप्त नहीं होने से कई जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं. जानकारी के अनुसार, यहां विगत 31 मार्च को महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ बी के सिन्हा सेवानिवृत्ति हो गये, इसके बाद भी कोल्हान विश्व विद्यालय द्वारा महाविद्यालय में किसी को भी प्राचार्य का प्रभार नहीं दिया गया है. महाविद्यालय में अध्यापन कार्य कराने वाले शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मियों का वेतन व मानदेय भुगतान प्रभावित हो रहा है.

स्नातक सेमेस्टर टू की परीक्षा आठ दिनों बादमहाविद्यालय में स्नातक सेमेस्टर टू की परीक्षा 24 अप्रैल से शुरू होने वाली है, जिसमें तीन हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल होंगे. प्राचार्य के नहीं होने से एडमिट कार्ड के लिए परेशानी हो रही है, वहीं बैगर केंद्राधीक्षक के कैसे परीक्षा का आयोजन होगा, यह एक सवाल बना हुआ है. कॉलेज में वित्तीय प्रभार नहीं होने के कारण सभी प्रकार के कार्य ठप हो गये हैं.

छह माह पूर्व डॉ बीके सिन्हा प्राचार्य बने थेकाशी साहु कॉलेज के प्राचार्य डॉ बीके सिन्हा 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए. उन्हें छह माह पूर्व ही कॉलेज का प्राचार्य बनाया गया था. सेवानिवृत्ति के पहले उन्होंने प्राचार्य को लेकर पत्र के माध्यम से केयू को अवगत कराया था, बावजूद केयू द्वारा प्राचार्य का प्रभार अभी तक किसी को नहीं दिया गया है.

1969 में हुई थी महाविद्यालय की स्थापनातत्कालीन बिहार राज्य के समय सन 1969 ई में काशी साहू महाविद्यालय की स्थापना हुई थी. उस समय सरायकेला सिर्फ एक अनुमंडल हुआ करता था और पश्चिमी सिंहभूम जिले का हिस्सा था. उस समय सरायकेला में एक मात्र काशी साहु महाविद्यालय संचालित था. यहां अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र के गरीब वर्ग के छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं.

10 हजार विद्यार्थी नामांकितकाशी साहू महाविद्यालय के विभिन्न विभागों में करीब 10 हजार विद्यार्थी नामांकित हैं, जो अध्ययन कर रहे हैं. प्राचार्य के नहीं रहने से 10 हजार विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक रहा है.

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Author: DEVENDRA KUMAR

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