खरसावां.
सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है. इसके बावजूद भी सरायकेला-खरसावां जिला में सड़क दुर्घटना की संख्या में कमी नहीं आ रही है. जिला में साल दर साल सड़क हादसे बढ़ रहे हैं. इससे लोगों की जान-माल की क्षति हो रही है. मौत के आंकड़ें डरावने हैं. आंकड़ों पर गौर करें, तो वर्ष 2025 में जिले में 253 सड़क दुर्घटनाओं में 220 लोगों ने जान गंवायी है, जबकि 345 घायल हुए.रफ्तार व लापरवाही से हर महीने औसतन 19 मौतें
जिले में जर्जर सड़कें, वाहनों की रफ्तार व चालकों की लापरवाही से प्रत्येक माह औसतन 19 लोगों की जान जा रही है. जिले की कई सड़कों पर गड्ढे बने हुए हैं. वहीं, जहां अच्छी सड़क है, वहां तेज रफ्तार व ओवरलोडिंग से हादसे हो रहे हैं. जिला प्रशासन के लिए हादसों पर अंकुश लगाना बड़ी चुनौती है. वर्ष 2024 के मुकाबले वर्ष 2025 में करीब 27 प्रतिशत अधिक लोग सड़क हादसों में अपनी जान गवां चुके हैं. वर्ष 2024 में 173 लोगों की जान गयी थी. वहीं, वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 220 हो गया है. 2023 में 153, 2022 में 161, 2021 में 145 लोग शिकार हुए हैं.
दुर्घटना वाले प्रमुख क्षेत्र
सरायकेला से आदित्यपुर, सरायकेला से चाईबासा, कांड्रा-चौका, हाता-राजनगर-चाईबासा व चांडिल के एनएच 33 व एनएच-32 में अक्सर दुर्घटनाएं हो रही हैं. ओवर स्पीड व यातायात नियमों की अनदेखी के कारण ज्यादातर दुर्घटनाएं हुई हैं. बिना हेलमेट बाइक चलाना, ट्रिपल राइडिंग, ड्रिंक एंड ड्राइव जैसी लापरवाही के कारण हादसे बढ़ रहे हैं.स्टंटबाजी बड़ा खतरा
जिले में सड़क हादसों में वृद्धि का एक कारण युवाओं द्वारा बाइक पर स्टंट करना भी है. शाम होते ही सड़कों पर कई बाइकर्स खुलेआम स्टंट करते देखे जाते हैं. इससे दूसरे वाहन चालक को भी खतरा होता है. प्रेशर हॉर्न, तेज आवाज वाले साइलेंसर और ध्वनि प्रदूषण भी गंभीर समस्या हैं.
आठ वर्षों में हुई दुर्घटनाएं व मौत
वर्ष दुर्घटना मौतघायल2018 182 121 87
2019 226165 1182020 171124 88
2021181 145842022 215161 118
2023209 153 1262024 198 173 90
2025 253 220 345वर्ष 2025 में हुई मौतें
माह मौतें
जनवरी 15फरवरी 20
मार्च 21अप्रैल 18
मई 20जून 13
जुलाई 26अगस्त 19
सितंबर 12अक्तूबर 17
नवंबर 25दिसंबर 14
जिम्मेवार से सीधी बात
सवाल : सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने को क्या उपाय किये जा रहे हैं
जवाब :
जिले में मुख्य रूप से चांडिल में एनएच-32 व 33 व चाईबासा-राजनगर-हाता स्थित एनएच में ज्यादातर दुर्घटनाएं होती है. इन दोनों मार्गों पर दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिये प्रशासनिक पहल शुरु कर दी गयी है. सर्वे करा कर कार्य योजना तैयार किया गया है. आवश्यकता अनुसार स्पीड ब्रेकर, लाइट, रिफ्लेक्टिव ग्लास आकलन किया गया है. अगले एक माह के भीतर इसे इंप्लीमेंट कर दिया जायेगा. इस दिशा में कुछ काम शुरु भी कर दिये गये है. एनएच-33 में भी तीन प्वाइंट पर काम करने का प्रस्ताव भेजा गया है. जिला स्तर पर गठित समिति लगातार फील्ड विजिट कर स्थिति की जानकारी ले रही है. जहां भी कमियां है, उनका निराकरण किया जायेगा.सवाल : किन कारणों से सड़क हादसों के मामले बढ़ रहे हैं ?
जवाब :
सड़क दुर्घटनाओं के अलग अलग कारण सामने आ रहे हैं. यातायात नियमों का अनुपालन कर सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है. इसके लिये सड़क सुरक्षा के तहत जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. लोगों को यातायात नियमों का अनुपालन कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
