खरसावां. प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा को पिलायी गयी जड़ी-बुटी
खरसावां : नौ जून को देवस्नान पूर्णिमा पर अत्यधिक स्नान से बीमार हुए प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा का इलाज मंदिर के अणसर गृह में किया जा रहा है. भक्तों को अभी प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं. बंद पड़े अणसर गृह के बाहर से ही भक्त पूजा-अर्चना कर रहे हैं. परंपरा के अनुसार, अणसर गृह में अलग-अलग जड़ी बूटी से तैयार दवा दें कर प्रभु का उपचार किया जा रहा है. तीनों ही देवी देवताओं को रोजाना अलग-अलग जड़ी-बूटी से तैयार की गयी दवा पिलायी जा रही है. प्रसाद स्वरुप इसी दवा को भक्तों में भी वितरण किया गया.
मान्यता है कि स्नान पूर्णिमा से ठीक 15 दिन बाद प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा पूरी तरह से स्वस्थ हो जायेंगे. 24 जून को नेत्र उत्सव के दिन अणसर गृह में ही प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा भक्तों को दर्शन देंगे. नेत्र उत्सव पर भगवान जगन्नाथ के नव यौवन रूप के दर्शन होंगे. नेत्र उत्सव के मौके पर प्रतिमाओं का भव्य शृंगार किया जायेगा. 25 जून को प्रभु जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ रथ पर सवार हो कर अपने मौसी के घर जायेंगे, जिसे रथ यात्रा या घोष यात्रा के नाम से जाना जाता है. इसी दौरान हेरा पंचमी के दिन मां लक्ष्मी द्वारा प्रभु जगन्नाथ के रथ नंदीघोष को तोड़े जाने की परंपरा है. रथ यात्रा के नौंवे दिन तीन जुलाई को प्रभु जगन्नाथ अपने भाई व बहन के साथ मौसी घर से श्रीमंदिर वापस लौटते है. इसी के साथ ही वार्षिक रथ यात्रा का समापन हो जायेगा. रथ यात्रा को लेकर रथ निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है.
जिला के इन जगहों में होता है रथ यात्रा का आयोजन:
सरायकेला, खरसावां, हरिभंजा, सीनी, चांडिल, गम्हरिया, दलाईकेला, संतारी, जोजोकुड़मा, बंदोलोहर, चाकड़ी, पोटोबेड़ा आदि
रथ यात्रा के कार्यक्रम
24 जून : प्रभु जगन्नाथ का नेत्र उत्सव
25 जून : प्रभु जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा
27 जून : गुंडिचा मंदिर में विपत्तारिणी व्रत
29 जून : हेरा पंचमी पर महालक्ष्मी द्वारा प्रभु जगन्नाथ का रथ भंगिनी
03 जुलाई : वापसी यात्रा (बाहुडा रथ यात्रा) का आयोजन
