दुमका में अब गूंजेगी मांदर की थाप, 33 डिसमिल जमीन पर बनेगा आदिवासी संस्कृति का भव्य केंद्र

झारखंड के दुमका में आदिवासी संस्कृति और कला को बढ़ावा देने के लिए वृहद धुमकुड़िया भवन का निर्माण होगा. जानें इस सांस्कृतिक केंद्र की पूरी जानकारी.

दुमका.मांदर की गूंज, सोहराय-करम के सुर और पुरखों से मिली सांस्कृतिक थाती को सहेजने वाली दुमका की धरती अब आदिवासी अस्मिता के एक नए केंद्र के रूप में आकार लेने जा रही है. संताल परगना की समृद्ध जनजातीय लोक-परंपरा, जीवन-दर्शन, कला और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक परिवेश में संरक्षित करने के उद्देश्य से शहर में 'वृहद आदिवासी संस्कृति एवं कला केंद्र-सह-धुमकुड़िया भवन' का निर्माण किया जाएगा.

इसके लिए दुमका सदर अंचल के मौजा दिग्घी में भूमि का चयन कर लिया गया है. प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. परियोजना के आकार लेने के बाद यह केंद्र आदिवासी संस्कृति, लोककला और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

छह जिलों में बनेगा आदिवासी संस्कृति का नेटवर्क

यह पहल केवल दुमका तक सीमित नहीं है. झारखंड की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने के लिए राज्य के छह प्रमुख जिलों में ऐसे केंद्र विकसित करने की योजना है. विभागीय पत्राचार के अनुसार दुमका के अलावा गुमला, लोहरदगा, रांची, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम में भी वृहद धुमकुड़िया भवन-सह-बहुउद्देशीय केंद्र बनाए जाने का प्रस्ताव है.

इन जिलों के उपायुक्तों को विवाद-मुक्त भूमि चिह्नित कर निर्माण के लिए प्राक्कलन तैयार कराने का निर्देश दिया गया है. योजना के धरातल पर उतरने के बाद राज्य के अलग-अलग जनजातीय क्षेत्रों की लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को एक मजबूत मंच मिलने की उम्मीद है.

धुमकुड़िया की परंपरा को मिलेगा आधुनिक रूप

आदिवासी समाज में धुमकुड़िया का महत्व किसी सामान्य भवन से कहीं अधिक रहा है. यह परंपरागत रूप से सामाजिक जीवन, सामुदायिक संवाद, सांस्कृतिक शिक्षा और लोकज्ञान के हस्तांतरण का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है.

इसी पारंपरिक अवधारणा को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बहुउद्देशीय स्वरूप देने की दिशा में यह परियोजना तैयार की जा रही है. अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की पहल के बाद परियोजना को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुईं. विभाग के संयुक्त सचिव स्तर से निर्देश जारी होने के बाद समेकित जनजाति विकास अभिकरण (आईटीडीए) और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से आगे की प्रक्रिया शुरू की.

यह भी पढ़ें:

फरक्का में एक फीट धंसा रेलवे ट्रैक, कई ट्रेनें प्रभावित: स्टेशनों पर बढ़ी यात्रियों की भीड़

दिग्घी में 33 डिसमिल सरकारी जमीन चयनित

प्रशासनिक निर्देश के बाद दुमका सदर अंचल अधिकारी के नेतृत्व में राजस्व उपनिरीक्षक, अंचल निरीक्षक और अमीन की टीम ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया. जांच के बाद मौजा दिग्घी, थाना संख्या 31 के अंतर्गत अनाबादी खाता संख्या 15 और दाग संख्या 1316 की 33 डिसमिल सरकारी भूमि को परियोजना के लिए चिह्नित किया गया.

भूमि को विवाद-मुक्त पाए जाने के बाद राजस्व अभिलेखों और ट्रेस नक्शे का सत्यापन किया गया. इसके बाद स्थल संबंधी प्रतिवेदन कल्याण शाखा को भेज दिया गया है. भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब निर्माण से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है.

सोहराय भित्तिचित्रों से सजेगा भवन, आधुनिक सभागार की भी योजना

भूमि चयन के बाद अब भवन की तकनीकी रूपरेखा और प्राक्कलन तैयार कराने की प्रक्रिया तेज हो गई है. जिला कल्याण पदाधिकारी ने झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के पीआईयू, दुमका को तकनीकी स्वीकृति प्राप्त प्राक्कलन उपलब्ध कराने के लिए अनुरोध पत्र भेजा है.

प्रस्तावित भवन में जनजातीय स्थापत्य की झलक के साथ सोहराय भित्तिचित्रों और पारंपरिक कला को स्थान देने की परिकल्पना है. इसके साथ आधुनिक सभागार और बहुउद्देशीय सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, ताकि सांस्कृतिक आयोजनों के साथ अन्य सामुदायिक गतिविधियां भी संचालित हो सकें.

लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक ज्ञान का बनेगा मंच

निर्माण पूरा होने के बाद यह केंद्र आदिवासी संस्कृति, कला और संवाद का महत्वपूर्ण मंच बन सकता है. यहां लोकनृत्य, जनजातीय संगीत, पारंपरिक ज्ञान, लोककला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं होंगी.

संताल परगना की लोक परंपराओं को आधुनिक मंच मिलने से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा. साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और जीवन-दर्शन से जोड़ने में भी यह केंद्र अहम भूमिका निभा सकता है.

स्वीकृति के बाद धरातल पर उतरेगी योजना

परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए अब प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति की औपचारिकताओं को पूरा किया जाना है. इसके बाद संवेदक चयन की प्रक्रिया शुरू होगी और निर्माण कार्य धरातल पर उतर सकेगा.

दिग्घी की धरती पर जब यह धुमकुड़िया भवन आकार लेगा, तो यह दुमका के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ेगा. मांदर की थाप, लोकगीतों की गूंज, सोहराय की कला और पुरखों से मिली परंपराओं को आधुनिक मंच देने वाला यह केंद्र आने वाली पीढ़ियों के लिए आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और विरासत का जीवंत केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anand Jayswal

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >