सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करना आवश्यक

सिविल कोर्ट परिसर स्थित लोक अदालत कक्ष में बाल विवाहमुक्त भारत बनाने के लिए कार्यशाला का आयोजन

साहिबगंज. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष अखिल कुमार के मार्गदर्शन में सिविल कोर्ट परिसर स्थित लोक अदालत कक्ष में शुक्रवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ‘आशा’ योजना के तहत बाल विवाहमुक्त भारत बनाने के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया. बताया गया कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है, जिसे सामूहिक प्रयास से समाप्त किया जा सकता है. मल्टी-सेक्टोरल अप्रोच के अंतर्गत सभी संबंधित विभागों को एक मंच पर आने की आवश्यकता है. प्रशासनिक पदाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण, पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े लोग तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य एकजुट होकर इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. यह भी बताया गया कि बाल विवाह से लड़कियों की शिक्षा बाधित होती है. उनके रोजगार के अवसर समाप्त हो जाते हैं. वे मानसिक रूप से दुर्बल हो जाती हैं तथा उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. भारतीय कानून के अनुसार, लड़कियों के लिए न्यूनतम वैवाहिक आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गयी है. यदि कोई इससे पूर्व विवाह करता है, तो वह न केवल कानून का उल्लंघन करता है, बल्कि एक नाबालिग का भविष्य और उसके सपनों को भी तोड़ता है. न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं है. प्रत्येक माता-पिता और हर जागरूक नागरिक को यह समझना होगा कि बाल विवाह को रोकना केवल एक कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है. हमें लड़कियों को बोझ नहीं, बल्कि महत्त्वाकांक्षी, आत्मनिर्भर और संघर्षशील बनाना होगा. स्वावलंबन और आत्मसम्मान के साथ ही समाज की बेटियां आगे बढ़ सकती हैं. अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु पीडीजे अखिल कुमार के निर्देशन में एक टीम का गठन किया गया है. कार्यक्रम में डालसा के सचिव विश्वनाथ भगत, सीडब्ल्यूसी के सुभान, जिला बाल कल्याण पदाधिकारी पूनम कुमारी, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सहित अन्य गणमान्य थे.

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Published by: Abdhesh singh

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