उत्तरवाहिनी गंगा तट पर 31 जनवरी से सात दिवसीय राजकीय माघी पूर्णिमा मेला लगेगा. इसकी तैयारी में प्रशासनिक पदाधिकारी जुटे हैं. विदिन व सफाहोड़ समाज के आदिवासी श्रद्धालु अपने धर्म गुरुओं के साथ गंगा तट के आसपास क्षेत्र में अखाड़ा का निर्माण कर रहे हैं, विदिन समाज की ओर से गंगा तट पर अस्थायी मांझी व जाहेरथान का भी निर्माण धर्म गुरु अभिराम मरांडी की देखरेख में की जा रही है. वहीं, सफाहोड़ आदिवासी अपने धर्मगुरु जीवन मरांडी, बुद्ध मुर्मू, मनमय मरांडी, राम बाबा व बड़कू मुर्मू की देखरेख में अखाड़ा का निर्माण कर रहे हैं. प्रशासन की ओर से भी आदिवासी श्रद्धालुओं के ठहरने को लेकर पंडाल का निर्माण गंगा तट व मेला क्षेत्र में कराया जा रहा है. माघी पूर्णिमा मेला में आदिवासी व गैर आदिवासी श्रद्धालु लाखों की संख्या में गंगा तट पर बनाये जा रहे अस्थायी मांझी व जाहेरथान, माघी पूर्णिमा मेल पर गंगा स्नान करते हैं. आदिवासी श्रद्धालु अपने धर्म गुरुओं के साथ गंगा स्नान व गंगा पूजन के बाद लोटा में जल लेकर अखाड़ा में पहुंचकर भींगे कपड़े में ही पूजा करते हैं. गुरु शिष्य की निष्ठा व मां गंगा के प्रति आस्था यहां देखने को मिलती है. मरांग बुरु रूपी भगवान शिव व भगवान श्रीरामचंद्र की भी पूजा-अर्चना की जाती है. वेद से जुड़ा है. विदिन धर्म अभिराम विदिन समाज सुसर बैसी धर्म गुरु अभिराम मरांडी ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी लाखों की संख्या में विदिन समाज के श्रद्धालु झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार व पड़ोसी देश नेपाल के श्रद्धालुओं का जुटान 31 जनवरी से 6 फरवरी के बीच होगा. एक साथ सामूहिक रूप से उत्तरवाहिनी गंगा स्नान के बाद मांझीथान व जाहेरथान में जलाभिषेक किया जायेगा. कहा कि आदिकाल से विदिन समाज सनातन धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा के साथ पूजा कर रहे हैं.
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