वट सावित्री पूजा की तैयारी में जुटी थी पत्नी, शव देख करने लगी चीत्कार

बाजार जाने के लिए तैयार रहने को कह गये थे सुरजीत यादव

साहिबगंज. जवान सुरजीत की हत्या के बाद पुलिस कई मामलों में जांच में जुटी है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सुरजीत दिनभर और रात में किसके साथ था और किससे बातचीत की थी. जांच के दौरान पुलिस के सामने कई जानकारियाँ आई हैं. सुरजीत की पत्नी नीतू यादव का कहना है कि शनिवार को दोपहर करीब 12 बजे पति ने उन्हें वीडियो कॉल कर रविवार को बट पूजा की सामग्री खरीदने के लिए तैयार रहने को कहा था. उन्होंने सुरजीत से मोटरसाइकिल में तेल भरवाने की बात कही, जिस पर सुरजीत ने कहा कि वह तेल भरवा लेंगे. इसके बाद सुरजीत करीब 4:30 बजे अपने क्वार्टर पहुंचे. इससे पहले पत्नी से मामूली नोकझोंक हुई, जिसके बाद वह दोनों बच्चों को लेकर पड़ोस में रहने वाले शशि भूषण के कमरे में उनकी पत्नी के पास चली गईं. नीतू का कहना है कि सुरजीत शाम तक सुरक्षित अपने कमरे में ही थे. इस बात की पुष्टि के लिए उन्होंने शशि से बात की, तो शशि ने बताया कि सुरजीत उनके साथ ही हैं. सुरजीत की पत्नी बट पूजा की तैयारी में जुटी थी. इस संबंध में उसने शनिवार को सुरजीत से बात भी की थी. सामान लेने के मामले में दोनों तैयार थे और खुशी-खुशी एक-दूसरे से बात भी की थी. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और बट पूजा के एक दिन पहले ही नीतू का सुहाग उजड़ गया. अब उसका पति ही इस दुनिया में नहीं रहा. पत्नी ने बताया, शाम में शशि के साथ निकले थे पति पत्नी का कहना है कि शाम को सुरजीत शशि के साथ बाहर निकले थे. उन्होंने बताया कि रात में जब उन्होंने सुरजीत के बारे में जानने के लिए शशि से बात की तो शशि ने बताया कि वह फाड़ी में हैं और वहीं सो जाएंगे. नीतू ने कहा कि सुरजीत अक्सर देर से घर आते थे, और कभी-कभी अधिक शराब पीने के कारण अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के घर भी रुक जाते थे. उन्होंने सोचा कि इस बार भी ऐसा ही हुआ होगा, लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम था कि यह उनकी अंतिम मुलाकात होगी. क्वार्टर में सुरजीत के पास कौन शख्स था मौजूद साहिबगंज – सुरजीत शशि के साथ उसके फाड़ी में सोया हुआ था. इस बात का खुलासा मृतक की पत्नी ने किया. उन्होंने यह भी बताया कि शशि से पूछने पर उसे उत्तर मिला कि रात में ही वह चाबी लेकर किसी के क्वार्टर में सोने चला गया था. मुझे इस मामले में जानकारी नहीं है. लोगों ने सवाल उठाए हैं कि आखिर सुरजीत जब शशि के पास था तो वह अकेले उस क्वार्टर में कैसे पहुंच गया. क्या सुरजीत के साथ कोई और वहां मौजूद था. क्या इस हत्या के पीछे पहले से षड्यंत्र रचा गया था. सुरजीत दिन से ही शराब पी रहा था. इस बात की खबर उसके कई दोस्तों को थी. दिन में उसने शराब पी थी. शाम तक जब वह घर पहुंचा तब भी नशे में ही था. नशे की हालत में उसने पत्नी से लड़ाई की. घर से निकला तब तक सुरजीत का नशा चरम पर था. नशे की हालत में ही वह फाड़ी में सोने को राजी हो गया था. लेकिन ऐसी क्या बात हो गई कि वह महिला बैरक के निकट बंद क्वार्ट��� में पहुंच गया, क्योंकि क्वार्टर के मालिक जितेंद्र अपनी मां को इलाज कराने शहर से बाहर गए हुए थे. उनकी चाबी किसी दोस्त के पास थी. शव पहुंचते ही दहाड़ मारकर रोने लगे घरवाले जैसे ही मृतक सुरजीत का शव अस्पताल पहुंचा, पूरे परिसर में रोने और चिल्लाने की आवाजें गूंजने लगीं. पत्नी बिलखते हुए कहती रही कि “मेरा सुरजीत मुझे छोड़कर कहां चला गया, मेरा सोना मुझसे जुदा हो गया, ए भगवान, मुझे मेरा सोना वापस ला दो. ” सास दामाद का शव देखकर चीखते हुए बोली, “ऐसा क्या हो गया भगवान, मेरी बेटी का सुहाग उजड़ गया, अब कौन इसकी देखभाल करेगा, बच्चों की परवरिश कौन करेगा, इन्हें संभालेगा कौन. ” सुरजीत ससुराल में सबसे बड़ा दामाद और बेटे जैसा था. जानकारी के अनुसार, घटना की रात करीब 11:30 बजे उसने अपने साले की पत्नी से हंसी-मजाक में बात की थी. उस समय वह पूरी तरह स्वस्थ था और उसे कोई परेशानी नहीं थी. दस वर्ष पूर्व हुआ था विवाह साहिबगंज – सुरजीत मूल रूप से महेशपुर (लिट्टीपाड़ा) का निवासी था. उनके पिता का नाम बृजमोहन यादव है. वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था. वर्ष 2011 में उसकी नियुक्ति जिला पुलिस में हुई थी. वर्ष 2015 में उसका विवाह शोभनपुर भट्टा निवासी नीतू यादव से हुआ था. उनके दो बेटियां हैं, जिनमें बड़ी करीब 8 वर्ष की और छोटी लगभग 3 वर्ष की है. मामूली विवादों के अलावा परिवार में सब सामान्य था. अचानक हुई इस घटना ने नीतू की पूरी दुनिया बदल दी. अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी पर आ गई है, साथ ही दोनों बच्चियों के लालन-पालन का दायित्व भी. शव के पास सबसे पहले पहुंचा था शशि साहिबगंज. मृतक की पत्नी को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उसके पति सुरजीत यादव अब इस दुनिया में नहीं हैं. वह रोज की तरह अपने घर के कामकाज में व्यस्त थी. उधर, सुरजीत को खोजने के लिए सबसे पहले शशि निकला था. यह जानकारी नीतू ने दी. उन्होंने बताया कि सबसे पहले शशि उस क्वार्टर में पहुंचा, जहां सुरजीत जमीन पर गिरा हुआ था. वह उसे देखकर सीधे अपने कमरे में गया. पहले उसने अपनी पत्नी को यह बात बताई. इसके बाद सुरजीत की पत्नी को जानकारी दी गई. फिर हम तीनों अग्नि सामान विभाग के जंगल के रास्ते क्वार्टर पहुंचे. वहां जाकर देखा कि सीढ़ियों के पास मेरे पति अर्धनग्न अवस्था में गिरे पड़े थे. उन्होंने सिर्फ गमछा पहन रखा था. उनके शरीर पर और कोई कपड़ा नहीं था. इसके बाद इसकी सूचना पुलिस पदाधिकारी को दी गयी. एसपी के नेतृत्व में दी गई सलामी साहिबगंज. आरक्षी सुरजीत कुमार यादव के शव का पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में रविवार दोपहर प्रभार एसपी अनिमेष नथानी के नेतृत्व में सलामी दी गई है. जहां सदर एसडीपीओ किशोर तिर्की, मुख्यालय डीएसपी विजय कुमार कुशवाहा, राजमहल एसडीपीओ विमलेश कुमार त्रिपाठी, मेजर रोहित दुबे, पुलिस निरीक्षक राजीव रंजन मौजूद थे. जिन्होंने बारी-बारी से जवान को सलामी दिया. 2 मिनट का मौन रखा गया. इसके बाद सभी ने पुष्प अर्पित किए. मौके पर कई पुलिस पदाधिकारी व पुलिसकर्मी मुख्य रूप से मौजूद थे. पुलिस मेंस एसोसिएशन ने किया निष्पक्ष जांच की मांग जवान सुरजीत यादव की शव बरामद होने के खबर पाते ही फौरन मेंस एसोसिएशन के सुनील शर्मा, रामप्रसाद, मंटू पासवान, पवन कुमार व नवीन मुर्मू घटना पर पहुंचे. )जवान के शव को पुलिस पदाधिकारी की मौजूदगी में सदर अस्पताल पहुंचाया. इसके बाद भी कई कागजी प्रक्रिया के दौरान भी मुस्तैद दिखाई दिए. पुलिस मेंस एसोसिएशन के सुनील शर्मा ने कहा कि एसोसिएशन के तरफ से हम सब जवान सुरजीत यादव की हत्या की निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं. इसके पीछे जो भी लोग शामिल है उस पर कठोर कार्रवाई की जाए. क्या कहते हैं डीएसपी शव मिलने की सूचना प्राप्त होते ही पुलिस मौके पर पहुंची है. मृतक पुलिस का एक जवान है, जिनका नाम सुरजीत यादव है. प्रथम दृष्टया हत्या का प्रतीत होता है. इसे किसने अंजाम दिया और इसके क्या कारण है इस मामले में पुलिस अनुसंधान कर रही है. दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी. विजय कुमार कुशवाहा, मुख्यालय डीएसपी साहिबगंज

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Published by: Abdhesh singh

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