युवा वर्ग को प्रभु श्रीराम के चरित्र से लेनी चाहिए प्रेरणा : सुभाष शास्त्री

पूर्वी उधवा पंचायत अंतर्गत कचहरी घाट परिसर में श्रीराम कथा का आयोजन

उधवा

पूर्वी उधवा पंचायत अंतर्गत कचहरी घाट परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन बुधवार को लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. कथावाचक सुभाष शास्त्री जी महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपने पिता का वचन पूरा करने और अपनी माता कैकेई की आज्ञा निभाते हुए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था. महल की सारी सुख सुविधाएं छोड़ जंगल में गये. आज के युवा वर्ग को मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए. प्रभु श्रीराम का नाम मात्र लेने से आत्मा को परम शांति प्राप्त होती है. राम का नाम सच्चे मन से लेने पर सारी चिंताएं स्वयं नष्ट हो जाती है. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम-सीता माता के साथ स्वयंवर से अपने घर वापस अयोध्या लौटे. दासी मंथरा ने कैकेई के कान भर दिए. मंथरा ने राजा दशरथ से वरदान मांगने को कहा. कैकेई के कहे अनुसार राजा दशरथ ने भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को राजा बनाने का वचन दे दिया. कहा कि प्रभु श्रीराम ने बिना तर्क किए बड़े ही प्रेम भाव से अपने पिता की आज्ञा को स्वीकार कर लिया. कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन काल में एक सच्चे पुरुष की सभी मर्यादाएं निभाई. बोले कि ऐसे ही उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम नहीं कहा जाता है, जब श्रीराम वन जाने को तैयार हुए उनके पीछे लक्ष्मण की जिद के भाव का प्रसंग सुन भक्त भाव विभोर हो गये. मौके पर श्रीराम कथा कमेटी के अध्यक्ष संजीव कुमार यादव, सचिव ओमप्रकाश आर्य, कोषाध्यक्ष प्रदीप साहा, उपाध्यक्ष हब्बू चौधरी, सुनील प्रमाणिक, हरिशंकर साहा, परिमल साहा, सुकुमार चौधरी, असीत दास, प्रकाश शर्मा आदि कार्यक्रम में सहयोग कर रहे हैं.

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By ABDHESH SINGH

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