बोरियो के 107 विद्यालयों में एक शिक्षक, पढ़ाई बाधित

शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूल, बच्चों का भविष्य अधर में

बोरियो. प्रखंड में इन दिनों शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है. विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है. कुल 192 विद्यालयों में से 107 ऐसे हैं जहां केवल एक ही शिक्षक कार्यरत हैं. ऐसे में न केवल पढ़ाई, बल्कि मध्याह्न भोजन, कार्यालयीय कार्य और बच्चों की देखरेख जैसे ज़रूरी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं. स्थिति इतनी विकट है कि कई विद्यालयों में छात्र ही शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं. एकमात्र शिक्षक से यह अपेक्षा करना कि वे पढ़ाई भी कराएं, भोजन योजना भी देखें और प्रशासनिक कार्य भी संभालें, न केवल अव्यावहारिक है बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय भी है. कई बार शिक्षकों को बीएलओ प्रशिक्षण या बैठक के लिए प्रखंड मुख्यालय जाना पड़ता है, जिससे विद्यालय बिना शिक्षक के ही खुलते हैं. हाल ही में सात एकल शिक्षक वाले विद्यालयों के शिक्षकों को बीएलओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है. इनमें प्राथमिक विद्यालय तेतरिया, पोखरिया संथाली, कारीकांदर, रानीडीह, बड़ा कुसमी, डेमचक और चपगामा शामिल हैं. इन शिक्षकों को अब चुनाव संबंधी कार्यों में भी लगाया गया है, जिससे विद्यालयों का संचालन और अधिक प्रभावित हो गया है. शिक्षा का यह संकट केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, यह उन बच्चों की ज़िंदगी से जुड़ा सवाल है जो हर दिन अधूरी कक्षाओं और बंद विद्यालयों के बीच अपने सपनों को तलाशते हैं. जब शिक्षक ही नहीं होंगे, तो शिक्षा की लौ कैसे जलेगी. यह समय है जब प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से सोचने और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा का अधिकार केवल कागज़ों तक सीमित न रह जाए.

क्या कहते हैं बीइइओ

शिक्षकों की कमी के कारण बीएलओ के कार्यभार से पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है. एकल विद्यालय के शिक्षकों को बीएलओ के कार्य से मुक्त कराने हेतु उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी.

तरुण कुमार घाटी, बीइइओ

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By ABDHESH SINGH

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