दियारा क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए दशकों से सहारा है चचरी पुल

बहुडुब्बी नदी पर उच्चस्तरीय पुल निर्माण की बनी योजना, पर शुरू नहीं हुआ काम

राजमहल

उधवा प्रखंड अंतर्गत दियारा क्षेत्र के कई गांवों के दस हजार से अधिक आबादी दशकों से एक चचरी पुल के सहारे अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं. यहां के लोग वर्षों पहले नदी आर – पार होने के लिए नाव का इस्तेमाल करते थे. नदी के एक तरफ आंगनबाड़ी, प्राइवेट स्कूल, सरकारी विद्यालय, प्रखंड मुख्यालय, स्वास्थ्य केंद्र आदि हैं. वहीं, दूसरी तरफ कई गांव एवं कृषि योग्य सैकड़ों एकड़ भूमि हैं. दोनों तरफ से सैकड़ों लोगों को अपने दैनिक कार्यों को लेकर प्रतिदिन आवागमन होता है. हम बातें कर रहे हैं उधवा प्रखंड से करीब 5 किलोमीटर पूरब की ओर उत्तर पलासगाछी पंचायत अंतर्गत बहुडुब्बी नदी की. उत्तर पलासगाछी पंचायत अंतर्गत गंगा नदी से कनेक्टेड बहुडुब्बी नाम से एक छोटी नदी है. नदी पार होने की लंबाई करीब एक सौ मीटर होगी. बहुडुब्बी नदी के एक तरफ पातुटोला, हुक्मत टोला, बरकत बाजार, बनगांव, माेजु टोला, हाजी खुरसुद्दीन टोला, नूरा हाजी गांव एवं दूसरी तरफ दानिश टोला, नजरुल टोला, रफाटोला, गुही टोला, खुशबोर टोला, बबलाबोना गांव आती थी. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां दस हजार से अधिक जनसंख्या है. उक्त गांव के स्कूली छात्र-छात्रा, बच्चे-बुजुर्ग, महिलाएं, किसान, छोटे व्यापारी आदि का प्रतिदिन आवागमन होता है. ग्रामीणों ने बताया कि तीन दशक से अधिक समय से यहां का यही हाल है. पहले लोगों का आवागमन नाव के माध्यम से होता है. फिर यहां कुछ लोग मिलकर बांस-बल्ला से चचरी बनाकर व लगाकर आवागमन आरंभ किया. समय बीतते गया और लोगों के आवागमन की संख्या अधिक होने लगी, जिससे चचरी पुल के मरम्मत का खर्च अधिक होने लगा. इस पर स्थानीय लोगों की सहमति से आर-पार होने पर निर्धारित शुल्क लिया जाने लगा, जो अब तक बरकरार है. स्थानीय लोगों ने बताया कि वक्त बदलते गया, विधायक, सांसद व सरकारें बदली, परंतु यहां की दशा नहीं बदली. लोग यहां उच्चस्तरीय पुल निर्माण की मांग करने लगे. मांग पर पहल हुआ. विभाग ने संज्ञान लेते हुए यहां उच्चस्तरीय पुल निर्माण के लिए योजना बनाई. विगत दो वर्ष पहले पुल बनाने के लिए विभाग की ओर से टीम गठित कर उक्त स्थल का भौतिक सत्यापन किया. टीम ने स्थल पर पहुंचकर आवश्यक जानकारियां जुटायी. यहां उच्चस्तरीय पुल निर्माण के लिए 493.146 लाख का डीपीआर तैयार किया. डीपीआर वरीय पदाधिकारी को भेजा गया. तत्पश्चात दफ्तरों में दौड़ने के बाद ग्रामीण विकास विशेष विभाग से यहां उच्चस्तरीय पुल निर्माण का टेंडर हुआ. सवाल है कि हजारों लोगों को उनके सपने को कब सच होगा. स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत के दौरान कुछ लोग काफी खुश थे कि अब यहां उच्चस्तरीय पुल निर्माण होगा, जिससे आवागमन करने में सुविधा होगी.

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By ABDHESH SINGH

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