प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार अखिल कुमार के मार्गदर्शन में बुधवार को न्यायालय परिसर में सड़क सुरक्षा और नशा मुक्ति को लेकर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन को यातायात नियमों के प्रति संवेदनशील बनाना और नशे से दूर रहने का संदेश देना था. इस अवसर पर सड़क सुरक्षा से जुड़े व्यवहारों पर आधारित एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया, जिसके माध्यम से बिना हेलमेट वाहन चलाने, नशे की हालत में ड्राइविंग, तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और लापरवाही से वाहन चलाने जैसे खतरनाक कृत्यों के दुष्परिणामों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी, जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और आम नागरिक उपस्थित रहे. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत ने सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं. उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और पुलिस को समयबद्ध जांच पूरी कर आवश्यक दस्तावेज न्यायालय को उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय और मुआवजा मिल सके. उन्होंने बताया कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं नियमों की अनदेखी और नशे में वाहन चलाने के कारण होती हैं, जिनमें 18 से 35 वर्ष के युवा अधिक प्रभावित होते हैं. कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार हिट एंड रन मामलों के त्वरित निपटारे और मुआवजा प्रक्रिया पर भी चर्चा की गयी. नुक्कड़ नाटक और संबोधनों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सुरक्षित ड्राइविंग ही सुरक्षित जीवन की कुंजी है.
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