राजमहल. राजमहल के एक निजी क्लिनिक में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में, सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दंडाधिकारी और पुलिस की मौजूदगी में रविवार देर रात नया बाजार मोड़ के पास हयात पॉलीक्लिनिक नामक नर्सिंग होम की जांच की. प्रसव के दौरान हुई इस घटना के बाद, जांच टीम को कई अनियमितताएं मिलीं. टीम ने संचालक से भर्ती मरीजों, उनकी देखभाल करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और पंजीकरण संबंधी दस्तावेजों की जानकारी मांगी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. नर्सिंग होम में मरीजों के लिए कोई विशेष सुविधा या चिकित्सा उपकरण उपलब्ध नहीं थे. जांच के दौरान, तीन महिलाएं – हाजी बदल टोला की तंजीला खातून (23 वर्ष), दरगाह की कलीमा खातून (22 वर्ष), और श्रीधर साहब टोला की सुलेखा खातून (23 वर्ष) – भर्ती पाई गईं, जिनकी उसी दिन सर्जरी हुई थी. सीएस के निर्देश पर, उन्हें तत्काल राजमहल अनुमंडलीय अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया. सिविल सर्जन ने साहिबगंज सदर अस्पताल से डॉ. किरणमाला को बुलाया, जिन्हें रात भर महिला मरीजों की देखभाल के लिए राजमहल में तैनात किया गया. दवाएं उपलब्ध थीं, लेकिन उनसे संबंधित लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किए गए. सूत्रों के अनुसार, जांच टीम को प्रथम दृष्टया नर्सिंग होम बिना कागजात के चलता हुआ मिला. मौके पर दंडाधिकारी के रूप में राजमहल अंचल अधिकारी मोहम्मद यूसुफ, राजमहल अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. उदय टुडू, और राजमहल थाना के एसआई ओमप्रकाश चौहान सहित कई कर्मी उपस्थित थे. क्या कहते हैं सिविल सर्जन. शनिवार को हयात पॉली क्लिनिक में जच्चा बच्चा की मौत की सूचना पर जांच के लिए क्लिनिक पहुंचे. मरीज को देखने के लिए एक भी डाॅक्टर उपस्थित नहीं मिला. ना ही बच्चों का कोई डॉक्टर नहीं था और क्लिनिक संबंधित कागजात की मांग करने पर प्रस्तुत नहीं किया गया. तत्काल क्लिनिक बंद रखने का निर्देश दिया गया है. डॉ रामदेव पासवान, सीएस , साहिबगंज. क्या कहते हैं सीओ हयात क्लिनिक में जांच के दौरान मरीज के लिए क्लिनिक में जैसी सुविधा होनी चाहिए थी, वहां नहीं मिली. क्लिनिक संबंधित कागजात की मांग की गयी है. जांच के उपरांत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. मो युसूफ, सीओ , राजमहल.
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