सुहाग की रक्षा के लिए सुहागिनों ने की वट वृक्ष की पूजा
कथा को सुनने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है
राजमहल/मंगलहाट . उत्तर वाहिनी गंगा तट पर राजमहल सहित मंगलहाट, कसवा, सरकंडा, बुधवरिया के विभिन्न क्षेत्रों में सुहागिनों ने सोमवार को वट सावित्री व्रत की. इससे महिलाओं ने सुबह में गंगा स्नान किया. सामूहिक रूप से वट वृक्ष के नीचे एकत्रित होकर पूजन कर कच्चे धागे वट वृक्ष में बंधा. अपने पति की दीर्घायु की कामना की. वट वृक्ष पूजन का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. इस दिन सुहागन अपने सुहाग की लंबी आयु की रक्षा एवं संतान की प्राप्ति के लिए पूजा-अर्चना करती हैं. शाम के समय वट की पूजा करने पर ही व्रत को पूरा माना जाता है. इस दिन सावित्री व्रत और सत्यवान की कथा सुनने का विधान है. शास्त्रों के अनुसार इस कथा को सुनने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है. कथा के अनुसार सावित्री यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी. तब से इस व्रत को सुहागन करती आ रही हैं. इस व्रत में कुछ महिलाएं फलाहार का सेवन करती हैं तो कुछ निर्जल उपवास भी रखती हैं.
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